अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान “पूरी तरह ढहने की स्थिति” में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को फिर से खोलने का अनुरोध किया है।
ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान ने यह संदेश कैसे भेजा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान नेतृत्व संकट का सामना कर रहा है।
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान ने अभी हमें सूचित किया है कि वे ‘पूरी तरह ढहने की स्थिति’ में हैं। वे चाहते हैं कि हम ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द खोलें’, जबकि वे अपनी नेतृत्व स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।”
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ अब भी बंद
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ अब भी जहाजों के लिए बंद है। यह स्थिति अमेरिका और इज़रायल से जुड़े कई हफ्तों के संघर्ष के बावजूद बनी हुई है। यह संकीर्ण मार्ग वैश्विक व्यापार में बेहद अहम भूमिका निभाता है। दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोक रखा है। इसका उद्देश्य ईरान की तेल आय को कम करना है। ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, वह इस जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा।
नाकेबंदी और सैन्य तैनाती
ईरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। उसने नौसैनिक बल तैनात किए हैं और जलमार्ग में लगभग 6,000 बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। वहीं, अमेरिका ने भी इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लागू कर रखे हैं।
ईरान ने एक अस्थायी समझौते का प्रस्ताव दिया है। वह चाहता है कि अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाए, जिसके बदले वह जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है।
दोबारा खुलने को लेकर अनिश्चितता
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार करने में बहुत कम रुचि दिखाई है। इससे स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। करीब 2,000 जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
भले ही यह मार्ग फिर से खुल जाए, फिर भी कई जोखिम समुद्री यातायात को प्रभावित कर सकते हैं।
खाड़ी देशों के नेताओं की अहम बैठक
मंगलवार को सऊदी अरब में खाड़ी देशों के नेताओं की बैठक हुई। फरवरी में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद यह उनकी पहली बैठक थी। एक खाड़ी अधिकारी ने बताया कि नेताओं ने बार-बार हो रहे हमलों के जवाब में संयुक्त रणनीति पर चर्चा की।
28 फरवरी से अब तक इन देशों को ईरान की ओर से हजारों मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, 8 अप्रैल को युद्धविराम के बाद हमलों की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन खाड़ी देश अब भी सतर्क हैं। उन्हें डर है कि लड़ाई किसी भी समय फिर से शुरू हो सकती है।
