विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फिनलैंड दौरे के दौरान रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव किया। उन्होंने इस मुद्दे पर पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये की भी आलोचना की।
यह बयान तब आया जब एक पत्रकार ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि भारत रूस के प्रति “बहुत सहानुभूतिपूर्ण” है और रूस से तेल खरीदने को लेकर “बहुत इच्छुक” है।
भारत ने बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तेल खरीदा
जयशंकर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत ने यह निर्णय व्यावहारिक कारणों के आधार पर लिया। उन्होंने कहा,
“मैं दो बातें स्पष्ट करना चाहूंगा। मैं तेल खरीदता हूं लागत और उपलब्धता के आधार पर। उस समय बाजार में उपलब्ध अधिकांश तेल रूस से आ रहा था क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से मध्य पूर्व से तेल खरीद रहे थे, जो हमारा पारंपरिक आपूर्तिकर्ता था। इसलिए परिस्थितियों ने हमें एक विशेष दिशा में ले जाया।”
उन्होंने समझाया कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने मध्य पूर्व से अधिक तेल खरीदना शुरू कर दिया, जिसके कारण भारत ने रूस से उपलब्ध और सस्ता तेल लेना शुरू किया।
जयशंकर के अनुसार, भारत का यह निर्णय राजनीति से नहीं बल्कि बाजार की परिस्थितियों से प्रेरित था।
Participated in a Panel discussion at Kultaranta Talks with FM Elina Valtonen of Finland, and Assistant FM Lana Nusseibeh of UAE on ‘Emerging Powers and the New Geopolitical Competition https://t.co/S7MQD5wwFc
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 11, 2026
जयशंकर ने यूरोप के रुख पर सवाल उठाए
विदेश मंत्री ने फिर यूरोप के भारत के प्रति दृष्टिकोण में असंगति को उजागर किया। उन्होंने कहा, “कोई भी यूरोपीय देश भारतीय हथियारों से हमला का शिकार नहीं हुआ है। काश मैं यह कह पाता कि यूरोप में भारत के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता।”
जब उनसे इस बयान को स्पष्ट करने के लिए कहा गया, तो जयशंकर ने आगे कहा, “यूरोप हथियार बेचता है, जो भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते हैं। यह सिर्फ अभी नहीं, बल्कि कई वर्षों से हो रहा है। हम भारतीयों ने कभी भी यूरोप को खतरे में डालने जैसा कुछ नहीं किया। मुझे लगता है कि यह एक उचित बात है।”
उन्होंने तर्क दिया कि यूरोपीय देश ऐसे हथियारों की बिक्री जारी रखते हैं, जिनका प्रभाव भारत की सुरक्षा हितों पर पड़ता है।
जयशंकर: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को कहा
जयशंकर ने यह भी कहा कि 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर आक्रमण के बाद अमेरिका ने भारत से रूस से तेल खरीदने को कहा था।
उनके अनुसार, वाशिंगटन वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े व्यवधान को रोकना चाहता था। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत से तेल आपूर्ति स्थिर रखने और कीमतों में तेज बढ़ोतरी से बचने के लिए कहा, क्योंकि यूरोप ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे। उन्होंने कहा, “उस समय अमेरिका ने सीधे भारत से कहा था कि तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदा जाए। हम तेल लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं।”
इस बयान ने भारत के उस तर्क को मजबूत किया कि उसकी तेल खरीद आर्थिक और बाज़ार की जरूरतों पर आधारित है।
पश्चिमी नीतियों पर आलोचना
जयशंकर ने रूस के तेल को लेकर पश्चिमी देशों की नीतियों में विरोधाभास की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा आयात को अत्यधिक नैतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि कई देशों ने ऊर्जा सुरक्षा और बाजार स्थिरता को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों में बदलाव किया है।
भारत का ऊर्जा सुरक्षा पर रुख कायम
भारत ने यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से रूस से तेल आयात का लगातार बचाव किया है। सरकार का कहना है कि उसे अपने लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करनी होगी।
फिनलैंड में जयशंकर की टिप्पणियों ने इस रुख को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लिया और बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप प्रतिक्रिया दी। साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों की आलोचनाओं को खारिज करते हुए उनकी ऊर्जा और सुरक्षा नीतियों पर सवाल भी उठाए।
