अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन आरोपों से इनकार किया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपने नियंत्रण वाली एक संघीय एजेंसी के खिलाफ दायर मुकदमे का इस्तेमाल कथित राजनीतिक “शस्त्रीकरण” के पीड़ितों के लिए प्रस्तावित 1.8 अरब डॉलर के फंड को बनाने में मदद करने के लिए किया।
शुक्रवार को दायर कोर्ट दस्तावेज़ में ट्रंप के वकीलों ने कहा कि इंटरनल रेवेन्यू सर्विस (IRS) के खिलाफ उनका 10 अरब डॉलर का मुकदमा पूरी तरह वैध था। उन्होंने यह भी दावा किया कि न तो ट्रंप और न ही न्याय विभाग ने अदालत को गुमराह किया। साथ ही उन्होंने उस समझौते का भी बचाव किया, जिसके कारण पहले इस फंड की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में छोड़ दिया गया।
ट्रंप के वकीलों ने धोखाधड़ी के आरोप खारिज किए
ट्रंप की कानूनी टीम ने पूर्व संघीय न्यायाधीशों के समूह द्वारा लगाए गए आरोपों को सख्ती से खारिज किया। इन पूर्व न्यायाधीशों का कहना था कि ट्रंप और न्याय विभाग ने इस मुकदमे का इस्तेमाल एक कानूनी साधन के रूप में फंड बनाने के लिए किया और असल में कोई वास्तविक कानूनी विवाद था ही नहीं।
लेकिन ट्रंप के वकीलों ने कहा कि ये आरोप केवल अनुमान पर आधारित हैं, किसी सबूत पर नहीं। उन्होंने अदालत में लिखा, “इन साधारण दावों के आधार पर वे अदालत से गलत निष्कर्ष निकालने को कह रहे हैं कि पूरा मामला एक दिखावा था।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन इनमें से कोई भी तथ्य, अकेले या मिलकर, मिलीभगत का सबूत नहीं है, और न ही अदालत में धोखाधड़ी साबित करने के लिए जरूरी स्पष्ट और ठोस सबूत हैं।”
जज केस फिर से खोलने पर विचार कर रही हैं
इस बीच, अमेरिकी जिला न्यायाधीश कैथलीन विलियम्स यह तय कर रही हैं कि क्या इस मामले को फिर से खोला जाए। वह यह जांच कर रही हैं कि क्या ट्रंप और न्याय विभाग ने समझौते के दौरान अदालत को गुमराह किया था।
पिछले महीने 35 पूर्व संघीय न्यायाधीशों ने उनसे इस मामले की जांच करने की अपील की थी। उनका कहना था कि इस मुकदमे में कोई वास्तविक कानूनी विवाद नहीं था और इसे आगे बढ़ाया ही नहीं जाना चाहिए था। पूर्व न्यायाधीशों के वकीलों को 19 जून तक ट्रंप की फाइलिंग पर जवाब देना है।
ट्रंप टीम का दावा: समझौता कानूनी था
ट्रंप के वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि न्यायाधीश कैथलीन विलियम्स के पास सरकार और निजी पक्षों के बीच हुए समझौतों की समीक्षा या अनुमोदन का व्यापक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि समझौता इसलिए अवैध है क्योंकि यह अदालत में चल रहे किसी सक्रिय मुकदमे से जुड़ा नहीं था।
उन्होंने लिखा, “सरकारी समझौते इसी तरह काम करते हैं, और हमेशा से करते आए हैं।”
आगे की जांच की संभावना
अगर न्यायाधीश विलियम्स इस मामले को फिर से खोलती हैं, तो वह सार्वजनिक गवाही (public testimony) का आदेश दे सकती हैं। इसमें ट्रंप के वकील, उनके सहयोगी और न्याय विभाग के अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
अगर कोई गड़बड़ी साबित होती है, तो अदालत वित्तीय या पेशेवर दंड भी लगा सकती है।
1.8 अरब डॉलर फंड पर राजनीतिक विवाद
इस प्रस्तावित 1.8 अरब डॉलर के फंड को लेकर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स दोनों ने आलोचना की थी। इसी महीने कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कांग्रेस को बताया कि सरकार इस फंड को आगे नहीं बढ़ाएगी।
डेमोक्रेट्स का कहना था कि यह पैसा ट्रंप के समर्थकों को फायदा पहुंचा सकता है, और कुछ लोगों ने 6 जनवरी 2021 के कैपिटल हमले में शामिल लोगों को मुआवजा मिलने की आशंका भी जताई। बढ़ते विरोध के बाद प्रशासन ने इस योजना को छोड़ दिया।
समझौते की एक अहम शर्त अभी भी लागू
हालांकि फंड को हटा दिया गया है, लेकिन समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी लागू है। इसके तहत ट्रंप को उनके पुराने टैक्स मामलों की भविष्य की जांचों से सुरक्षा मिली हुई है।
वर्जीनिया कोर्ट का फैसला
शुक्रवार को वर्जीनिया की एक अदालत ने अस्थायी रूप से इस मामले से जुड़े किसी भी कदम पर रोक लगा दी। अदालत ने सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि टॉड ब्लैंच के बयान ही फंड रोकने के लिए पर्याप्त हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2019 में एक IRS कॉन्ट्रैक्टर ने ट्रंप के टैक्स रिटर्न मीडिया को लीक कर दिए थे। बाद में उस कॉन्ट्रैक्टर ने दोष स्वीकार किया और जेल की सजा भी काटी।
ट्रंप ने जनवरी में IRS के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, लेकिन न्याय विभाग का कहना था कि एक स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर की गलती के लिए IRS को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
समझौते से पहले उठे सवाल
अप्रैल में ही न्यायाधीश विलियम्स ने सवाल उठाए थे कि जब कोई वास्तविक कानूनी विवाद ही नहीं है, तो अदालत इस मामले की सुनवाई कैसे कर सकती है।
मुकदमा बिना जवाब के खत्म
ट्रंप ने न्याय विभाग की प्रतिक्रिया से पहले ही मुकदमा वापस ले लिया था, जिसके बाद अदालत ने केस बंद कर दिया।
समझौता कभी अदालत में दाखिल नहीं किया गया था, इसलिए इसे औपचारिक मंजूरी की जरूरत भी नहीं पड़ी। लेकिन पूर्व न्यायाधीश अब भी इस समझौते को चुनौती दे रहे हैं।
उन्होंने इसे “अदालत को धोखा देने वाला मिलीभगत वाला समझौता” बताया है।
अब न्यायाधीश कैथलीन विलियम्स को यह तय करना है कि क्या ये आरोप इतने गंभीर हैं कि इस विवादित समझौते की गहराई से जांच की जाए।
