JUSZnews

NEWS WITHOUT INTERRUPTION

Subscribe
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास भारतीय नाविकों को ले जा रहे तेल टैंकर पर ड्रोन हमला; सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचाए गए
हांगकांग के झंडे वाले एक तेल टैंकर, जिसमें 21 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ड्रोन हमले में नुकसान पहुँचा। हालांकि, सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया और किसी को भी चोट नहीं आई।

एक और तेल टैंकर, जिसमें पूरा चालक दल भारतीय था, 12-13 जून की रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास हमले का शिकार हो गया। इस घटना ने संघर्षग्रस्त क्षेत्र में संचालित वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, हांगकांग के झंडे वाला टैंकर बॉकेम मारेंगो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरते समय ड्रोन हमले की चपेट में आ गया। हमले में जहाज को नुकसान पहुँचा, लेकिन उस पर सवार सभी 21 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया और किसी को भी चोट नहीं आई।

सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ड्रोन हमले का शिकार हुआ टैंकर

रिपोर्टों के मुताबिक, टैंकर अमेरिकी नौसेना की नेवल कोऑपरेशन एंड गाइडेंस फॉर शिपिंग (NCAGS) सुरक्षा व्यवस्था के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। सुरक्षा ढाँचे के अंतर्गत होने के बावजूद, 12 और 13 जून की दरमियानी रात एक मानव रहित ड्रोन ने कथित तौर पर जहाज को निशाना बनाया।

हमले में जहाज के तीन हिस्सों को नुकसान पहुँचा। इनमें नंबर 1 और नंबर 2 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक भी शामिल थे। हालांकि नुकसान इतना गंभीर नहीं था कि जहाज डूब जाए और घटना के बाद टैंकर अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।

पूरे चालक दल में थे भारतीय नाविक

इस टैंकर का प्रबंधन एंग्लो-ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाता है और जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य भारतीय नागरिक थे। सूत्रों ने पुष्टि की कि हमले के बावजूद जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित रहे, जिससे क्षेत्र में एक और संभावित समुद्री त्रासदी टल गई।

भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर हमलों की श्रृंखला

यह ताजा हमला उन कई घटनाओं की सूची में शामिल हो गया है जिनमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास भारतीय नाविकों वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। बॉकेम मारेंगो पर हमले से पहले एमटी मैरिवेक्स, सेट्टेबेलो और जलवीर नामक जहाजों पर भी इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के निकट हमले हुए थे।

इनमें से एमटी सेट्टेबेलो पर हुआ हमला सबसे घातक साबित हुआ, जिसमें तीन भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक में काम कर रहे नाविकों के सामने मौजूद खतरों को उजागर किया है।

भारत सरकार रख रही है स्थिति पर नजर

भारत के शिपिंग मंत्रालय ने कहा है कि वह घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और ताजा हमले की जांच कर रहा है। मंत्रालय ने एमटी सेलेस्टियल (MT Celestial) पर मृत पाए गए एक भारतीय नाविक के संबंध में भी जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, जहाज सुरक्षित रूप से तट पर पहुँच चुका है और मृत नाविक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की प्रक्रिया से पहले ओमान पहुँचाया गया है।

मंत्रालय के मुताबिक, जारी तनाव के बावजूद लगभग 10 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 5 विदेशी ध्वज वाले जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। सरकार ने यह भी बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3,500 से अधिक नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है।

वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ है होर्मुज़ जलडमरूमध्य

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। संघर्ष बढ़ने से पहले वैश्विक कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लगभग 20 प्रतिशत व्यापार का आवागमन इसी मार्ग से होता था।

28 फरवरी को पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग में गंभीर व्यवधान देखने को मिला है। रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाई शुरू होने के बाद से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस जलडमरूमध्य में आवाजाही पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

स्थिति 13 अप्रैल को और जटिल हो गई, जब अमेरिका ने एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी, जिसके कारण जहाजों का ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश और निकास बाधित हो गया। वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार मंडरा रहे खतरों के बीच समुद्री सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्र में कार्यरत हजारों नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।