अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशों में कम से कम पांच और अमेरिकी राजनयिक मिशनों को बंद करने का फैसला किया है। यह कदम उनकी सरकार द्वारा दुनियाभर में अमेरिका की राजनयिक उपस्थिति को कम करने के प्रयासों की दिशा में एक और कदम है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रशासन द्वारा अमेरिका के राजनयिक नेटवर्क के पुनर्गठन के तहत प्रस्तावित बंदी की जानकारी कांग्रेस को दी है।
पांच राजनयिक मिशन होंगे बंद
बंदी के नवीनतम दौर में ग्रेनाडा के सेंट जॉर्ज स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ इंडोनेशिया के मेडान, कनाडा के विन्निपेग और जापान के नागोया स्थित वाणिज्य दूतावास शामिल हैं। प्रशासन कैमरून के डौआला स्थित दूतावास शाखा कार्यालय को भी बंद करेगा।
यह कदम ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेश विभाग के आकार को कम करने के व्यापक प्रयास के बाद उठाया गया है। पिछले साल प्रशासन ने दर्जनों ब्यूरो बंद कर दिए थे और सैकड़ों राजनयिकों को हटा दिया था।
और दूतावास बंद होने की संभावना
नवीनतम फैसला बड़े पैमाने पर कटौती योजना की शुरुआत मात्र हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अपनी "अमेरिका फर्स्ट" नीति के तहत दुनियाभर में 30 तक अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को बंद करने पर विचार कर रहा है।
आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर अमेरिका के राजनयिक नेटवर्क को कम करने से वैश्विक प्रभाव कमजोर हो सकता है और इसके दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं, जिन्हें बदलना मुश्किल होगा।
पिछले साल प्रशासन ने 10 दूतावासों, 17 वाणिज्य दूतावासों और तीन अन्य राजनयिक मिशनों को बंद करने का प्रस्ताव रखा था। इनमें पश्चिम एशिया और अफ्रीका की सुविधाएं भी शामिल थीं, जहां अमेरिका आतंकी संगठनों के खिलाफ आतंकवाद-रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अमेरिका पीछे हट रहा है, जबकि चीन विस्तार कर रहा है
अमेरिकी राजनयिक मिशनों में कमी ऐसे समय में हो रही है, जब चीन दुनियाभर में अपनी राजनयिक उपस्थिति का विस्तार कर रहा है। जहां अमेरिका दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और सरकारी कार्यक्रमों को बंद कर रहा है, वहीं राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने अपनी राजनयिक पहुंच को लगातार बढ़ाया है।
ट्रंप प्रशासन ने यूएस एड जैसे कार्यक्रमों को भी समाप्त कर दिया है और विदेशों में तैनात अमेरिकी राजनयिकों की संख्या कम कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन फैसलों से ऐसे खाली स्थान बन रहे हैं, जिनका इस्तेमाल चीन अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए कर सकता है, खासकर हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
राजनयिक पहुंच में अब चीन आगे
चीन पहले ही दुनियाभर में राजनयिक मिशनों की संख्या के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ चुका है। 2024 तक चीन के पास 274 राजनयिक मिशन थे, जबकि अमेरिका के पास 271 मिशन थे।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राजनयिक नेटवर्क में लगातार कमी से वैश्विक स्तर पर बीजिंग का प्रभाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ ने दी बढ़ते चीनी प्रभाव की चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की घटती राजनयिक उपस्थिति चीन को कई क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दे सकती है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर और चीन विशेषज्ञ सिंह ने कहा, “जैसे ही राष्ट्रपति ट्रंप यूरोपीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता कम करके यूरोप से और यूएस एड अभियानों को लगभग बंद करके अफ्रीका में मानवीय सहायता घटाकर पीछे हट रहे हैं, चीन इन क्षेत्रों में नए सिरे से पहुंच बनाने और अमेरिका की जगह प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तैयार है।”
