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यायर लापिड ने प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते को बताया ‘नेतन्याहू की पूरी विफलता’
यायर लापिड ने उभरते हुए अमेरिका-ईरान समझौते की आलोचना करते हुए दावा किया है कि यह इज़राइल के युद्ध उद्देश्यों को पूरा करने में विफल है और यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रमुख विपक्षी नेता यायर लापिड ने अमेरिका और ईरान के बीच उभरते हुए समझौते की कड़ी आलोचना की है। शनिवार को उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौता जारी संघर्ष से जुड़े इज़राइल के किसी भी उद्देश्य को पूरा नहीं करेगा और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर ईरान मुद्दे को गलत तरीके से संभालने का आरोप लगाया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लापिड ने कहा कि विकसित हो रहा यह समझौता महीनों के संघर्ष के बावजूद इज़राइल को कोई ठोस लाभ नहीं देगा।

लापिड ने लिखा, “वर्तमान में आकार ले रहा यह समझौता इज़राइल के किसी भी युद्ध उद्देश्य को हासिल नहीं करता।”

लापिड के अनुसार, यह समझौता ईरान के मौजूदा नेतृत्व को सत्ता में बने रहने की अनुमति देगा और उसकी मिसाइल क्षमताओं को भी सुरक्षित रखेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की चेतावनियों और दबाव के बावजूद तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से विकसित करने की क्षमता बनाए रखेगा।

लापिड ने इसे नेतन्याहू की विफलता बताया

विपक्षी नेता ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर नेतन्याहू को जिम्मेदार ठहराया और इसे इज़राइल के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक विफलता बताया।

लापिड ने इस घटनाक्रम को “नेतन्याहू की पूर्ण विफलता” करार देते हुए कहा कि इज़राइल ने अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर प्रभाव खो दिया है। उन्होंने कहा कि देश ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां उसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अन्य देशों के निर्देशों का पालन करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि “कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया हेरफेर या एआई से तैयार किया गया वीडियो इस विफलता को छिपा नहीं सकता।”

इज़राइल के भीतर बढ़ती चिंता

संभावित समझौते को लेकर चिंता जताने वाले लापिड अकेले नहीं हैं। अमेरिका-ईरान समझौते की खबरें सामने आने के बाद कई इज़राइली राजनेताओं, सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी अपनी आशंकाएं व्यक्त की हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था और अब दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौते के करीब दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, कई इज़राइली अधिकारियों को डर है कि प्रस्तावित शर्तें इज़राइल के सुरक्षा हितों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।

इज़राइली मीडिया संस्थान i24 न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता ईरानी सरकार को मजबूत कर सकता है और लेबनान में सैन्य कार्रवाई करने की इज़राइल की क्षमता को सीमित कर सकता है।

ईरान से जुड़े मुद्दों पर वर्षों से काम कर रहे विशेषज्ञ और अधिकारी भी जल्द हस्ताक्षरित होने वाले समझौता ज्ञापन को इज़राइल की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा मान रहे हैं।

क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर आशंकाएं

इज़राइली अधिकारी इस समझौते के व्यापक क्षेत्रीय प्रभावों को लेकर भी चिंतित हैं। एक अधिकारी ने चैनल 12 से कहा कि इसके तत्काल प्रभावों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना और ईरानी नेतृत्व की स्थिति का मजबूत होना शामिल होगा।

अधिकारी ने कहा, “तुरंत जो होगा, वह है होर्मुज़ जलडमरूमध्य का खुलना, शासन का पुनर्जीवन और ईरानी जनता के लिए एक बड़ा झटका।”

यह आलोचना ऐसे समय में सामने आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान महीनों की शत्रुता के बाद संभावित समझौते के करीब पहुंच रहे हैं। जहां समर्थक इसे संघर्ष समाप्त करने का रास्ता मानते हैं, वहीं इज़राइल के आलोचकों को डर है कि यह समझौता ईरान को मजबूत करेगा और इज़राइल के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को कमजोर कर सकता है।