कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को कहा कि बिहार और असम की सरकारों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। समूह ने यह भी दावा किया कि जल्द ही और राज्य भी इसी तरह की गारंटी जारी कर सकते हैं।
CJP नेताओं के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बिहार और असम सरकारों की आधिकारिक अधिसूचनाओं की प्रतियां सौंपीं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की पुष्टि की गई है।
CJP का दावा, राजस्थान ने भी दिया आश्वासन
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बाद में कहा कि पार्टी को आश्वासन मिला है कि राजस्थान में भी अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “बिहार और असम की अधिसूचनाओं के बाद, हमें अभी गारंटी दी गई है कि राजस्थान में कोई भी अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा।”
उनका यह बयान पार्टी द्वारा कई राज्यों में हिरासत और गिरफ्तारी की खबरों पर चिंता जताने के कुछ घंटे बाद आया।
CJP नेताओं ने दिल्ली पुलिस प्रतिनिधियों से की मुलाकात
मंगलवार तड़के करीब 2 बजे दास ने CJP की कानूनी संपर्क अधिकारी रत्ना सिंह के साथ एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल्ली पुलिस के उन प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जो बातचीत के दौरान “मध्यस्थ” की भूमिका निभा रहे थे।
दास ने कहा, “हमने उन्हें बताया कि हमें डर है कि सरकार अपना वादा पूरा नहीं करेगी।” उन्होंने यह बात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को लेकर कही।
उन्होंने यह भी बताया कि बैठक लगभग तीन घंटे तक चली। दास के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें बिहार सरकार की उस अधिसूचना की प्रति दी, जिसमें 26 जुलाई से पहले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की बात कही गई थी।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार और बीजेपी या NDA शासित अन्य राज्यों की ओर से भी इसी तरह की अधिसूचनाएं मंगलवार को जारी की जा सकती हैं। उन्होंने कहा, “उन्होंने केंद्र सरकार और अन्य बीजेपी/NDA राज्यों की ओर से कल तक गारंटी-अधिसूचनाएं जारी करने के अपने वादे को दोहराया है। उम्मीद है कि सहमति वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा।”
CJP ने प्रदर्शनकारियों से शांत रहने की अपील की
पार्टी ने पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। सौरव दास ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा, “हम आपके साथ हैं, हम सुनिश्चित करेंगे कि आपकी मदद के लिए वकील मौजूद हों।”
उन्होंने घोषणा की कि CJP एक वेबसाइट शुरू करने की तैयारी कर रही है, जो प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जिलों के वकीलों से जोड़ेगी। यह प्लेटफॉर्म कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे लोगों को आसानी से कानूनी सहायता प्राप्त करने में मदद करेगा।
कपिल सिब्बल ने 1 करोड़ रुपये की कानूनी सहायता की घोषणा की
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने नई कानूनी सहायता पहल के समर्थन के लिए 1 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की। उन्होंने पूरे भारत के वकीलों से भी इस प्रयास में योगदान देने की अपील की।
सिब्बल ने सोमवार रात सौरव दास के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “वे एक वेबसाइट बनाएंगे, जहां कानूनी सहायता देने के इच्छुक वकील अपना नाम, स्थान और वे किस तरह की मदद कर सकते हैं, इसकी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।”
मामले वापस नहीं लिए गए तो CJP ने दी नए प्रदर्शन की चेतावनी
CJP ने पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और गिरफ्तार किए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस नहीं लेती हैं तो संगठन अपना आंदोलन फिर शुरू करेगा।
दास ने समर्थकों को दिए अपने देर रात के संदेश में भी यही चेतावनी दोहराई। रांका ने एक्स पर लिखा, “हम मांग करते हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं, छात्रों को रिहा किया जाए और दिल्ली पुलिस/केंद्रीय जांच एजेंसियों/बीजेपी सहयोगी राज्यों की पुलिस द्वारा (हमारे समझौते के अनुसार) भविष्य में कोई FIR दर्ज न की जाए। ऐसा नहीं होने पर हमें फिर से प्रदर्शन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
सरकार द्वारा प्रमुख मांगें स्वीकार करने के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
CJP के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें अभिजीत दिपके भी शामिल हैं, ने शनिवार को अपना 37 दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया। यह फैसला धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से हटने और सरकार द्वारा कई प्रमुख मांगों को स्वीकार करने के कुछ घंटे बाद लिया गया।
इन मांगों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल था।
यह आंदोलन कथित NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही की मांग पर केंद्रित था। इसे देशभर के छात्रों और युवाओं का व्यापक समर्थन भी मिला।
