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संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद UAE के परमाणु संयंत्र में लगी आग
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और ठप अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद UAE के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास आग लग गई।

रविवार को अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, UAE के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आंतरिक सुरक्षा सीमा के बाहर एक विद्युत जनरेटर में संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद आग लग गई।

अधिकारियों ने बताया कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ और विकिरण सुरक्षा स्तर सामान्य बने रहे। फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन ने पुष्टि की कि आग लगने के बावजूद संयंत्र की महत्वपूर्ण प्रणालियां सामान्य रूप से काम करती रहीं। अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि संदिग्ध ड्रोन हमला किसने किया।

UAE के सामने बढ़ते क्षेत्रीय खतरे

यह घटना ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े संघर्ष के बीच बढ़ते तनाव के दौरान हुई। हाल के महीनों में UAE को ऊर्जा अवसंरचना और समुद्री सुविधाओं को निशाना बनाकर किए गए कई मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। अधिकारियों ने पहले इनमें से कुछ हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।

ताजा हमले ने खाड़ी क्षेत्र की महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

UAE ने तेज किया तेल निर्यात परियोजना का काम

यह हमला ऐसे समय हुआ जब UAE तेल निर्यात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने वाली एक बड़ी पाइपलाइन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को इस परियोजना पर काम तेज करने का निर्देश दिया है।

नई पाइपलाइन से फुजैराह के जरिए ADNOC की निर्यात क्षमता दोगुनी होने की उम्मीद है। अधिकारियों की योजना अगले वर्ष से इसका संचालन शुरू करने की है।

पहली बार निशाने पर आया बराकाह संयंत्र

रविवार की घटना पहली बार थी जब चार रिएक्टर वाले बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र को जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान निशाना बनाया गया। यह परमाणु संयंत्र अबू धाबी के एक दूरस्थ रेगिस्तानी क्षेत्र में सऊदी सीमा के पास स्थित है।

UAE ने दक्षिण कोरिया के सहयोग से 20 अरब डॉलर की इस परियोजना को विकसित किया था। यह संयंत्र 2020 में चालू हुआ और अरब प्रायद्वीप का पहला तथा एकमात्र परमाणु ऊर्जा स्टेशन बना।

हाल के वर्षों में, खासकर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, परमाणु सुविधाएं संघर्ष क्षेत्रों का हिस्सा बनती जा रही हैं।

अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान तेहरान ने कई बार दावा किया कि उसके बुशहर परमाणु संयंत्र पर हमला हुआ। हालांकि, रिपोर्ट्स में कहा गया कि रूस द्वारा संचालित इस संयंत्र को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा और कोई विकिरण रिसाव नहीं हुआ।

अमेरिका-ईरान वार्ता अब भी ठप

ड्रोन हमला ऐसे समय हुआ जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता ठप बनी हुई है। अमेरिका ने पिछले महीने सीधे हमले रोक दिए थे, लेकिन बाद में ईरान पर बंदरगाह नाकेबंदी लागू कर दी।

इस बीच, ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जो 28 फरवरी को संघर्ष बढ़ने से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस शिपमेंट का प्रमुख मार्ग था।

शिपिंग बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं और तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से चल रही वार्ताएं पिछले सप्ताह दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के नवीनतम प्रस्ताव खारिज करने के बाद से जमी हुई हैं।