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WHO ने कांगो और युगांडा में इबोला आपातस्थिति घोषित की
बुंडीबुग्यो वायरस से जुड़ी मौतों में तेज बढ़ोतरी के बाद WHO ने कांगो और युगांडा में फैले दुर्लभ इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित कर दिया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रविवार को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति (PHEIC) घोषित कर दिया।

दुर्लभ बुंडीबुग्यो इबोलावायरस से जुड़ी मौतों में तेज बढ़ोतरी के बाद WHO ने अपना सर्वोच्च अलर्ट जारी किया। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि यह प्रकोप वैश्विक महामारी नहीं माना जाएगा, क्योंकि संक्रमण अभी कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही फैला है।

WHO ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में बुंडीबुग्यो वायरस से फैल रहा इबोला अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति है, लेकिन यह महामारी आपातस्थिति के मानकों को पूरा नहीं करता।”

कांगो में तेजी से बढ़े इबोला मामले

यह 1976 के बाद से डीआरसी में इबोला का 17वां बड़ा प्रकोप है। पूर्वोत्तर इतुरी प्रांत सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।

16 मई तक अधिकारियों ने समुदाय स्तर पर 80 संदिग्ध मौतों की जानकारी दी। इसके अलावा, आठ लैब-पुष्ट मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि बुनिया, रवामपारा और मोंगब्वालु में कम से कम 246 संदिग्ध संक्रमण दर्ज किए गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बेहद दुर्लभ है। सामान्य ज़ैरे स्ट्रेन के विपरीत, इस वैरिएंट के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।

यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क से फैलता है। गंभीर मामलों में मरीज को तेज बुखार, शरीर में दर्द, उल्टी और अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है।

सीमाओं के पार पहुंचा वायरस

अब यह संक्रमण कांगो की सीमाओं से बाहर भी फैल चुका है। युगांडा ने पिछले 48 घंटों में राजधानी कंपाला में दो लैब-पुष्ट मामलों की पुष्टि की है। इनमें से एक संक्रमित व्यक्ति की मौत हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों संक्रमित लोग डीआरसी से यात्रा करके आए थे।

डीआरसी की घनी आबादी वाली राजधानी किंशासा में भी एक पुष्ट इबोला मामला सामने आया है। इससे बड़े शहरों और क्षेत्रों के बीच संक्रमित लोगों की आवाजाही को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौतियां

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में आपात सहायता और जरूरी मेडिकल आपूर्ति भेजनी शुरू कर दी है। लेकिन कठिन परिस्थितियों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

मौजूदा इबोला वैक्सीन केवल ज़ैरे स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी हैं और बुंडीबुग्यो वैरिएंट से सुरक्षा नहीं देतीं। इसके अलावा, अनौपचारिक सोना और हीरा खनन से जुड़ी लगातार आवाजाही ने संक्रमित लोगों के संपर्कों का पता लगाना और मुश्किल बना दिया है। स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित लोगों और उनके संपर्कों की निगरानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कम से कम चार स्वास्थ्यकर्मियों की मौत ने अस्पतालों और क्लीनिकों में संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। स्थिति को देखते हुए अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका CDC) ने डीआरसी, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ आपात बैठकें कीं। इन बैठकों में सीमा जांच कड़ी करने और बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई।

WHO ने महामारी घोषित क्यों नहीं की

WHO ने इस प्रकोप को महामारी आपातस्थिति घोषित नहीं किया क्योंकि यह वायरस हवा के जरिए फैलने वाली बीमारियों जैसा व्यवहार नहीं करता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन घातक जरूर है, लेकिन इसके कोविड-19 या इन्फ्लूएंजा की तरह व्यापक स्तर पर फैलने की संभावना कम है। उनका मानना है कि लक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों से अभी भी इस प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस आपात घोषणा का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय फंडिंग बढ़ाना और राहत कार्यों को तेज करना है, बिना वैश्विक दहशत फैलाए।