पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ने के बीच पूरे भारत में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि के बीच पाकिस्तान ने अपने कमजोर तेल भंडार को स्वीकार किया है, जो भारत की मजबूत ऊर्जा तैयारियों के साथ स्पष्ट अंतर को दर्शाता है।
संयुक्त अरब अमीरात 1 मई से ओपेक से बाहर हो जाएगा और सऊदी अरब के साथ बढ़ते तनाव तथा वैश्विक ऊर्जा झटके के बीच तेल उत्पादन पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करेगा।
अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि उसका तेल भंडारण लगभग अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंच चुका है। इस स्थिति ने उसे पुराने तेल टैंकरों का दोबारा उपयोग करने के लिए मजबूर कर दिया है और जल्द ही उत्पादन में कटौती पर विचार करने की नौबत आ सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान के बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।