मंगलवार को अमेरिकी सीनेट ने एक वॉर पावर्स (युद्ध शक्तियां) प्रस्ताव पारित किया, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निर्देश दिया गया कि जब तक कांग्रेस स्पष्ट मंजूरी न दे, तब तक वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोक दें।
फरवरी 2026 में शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहला ऐसा युद्ध शक्तियों से जुड़ा प्रस्ताव है, जिसे कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूरी मिली है। प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने 3 जून को इसे 215-208 के करीबी मतों से पारित किया था।
रिपब्लिकन सांसदों ने भी दिया डेमोक्रेट्स का साथ
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत होने के बावजूद चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने पार्टी लाइन से हटकर डेमोक्रेट्स के साथ मतदान किया। प्रस्ताव के समर्थन में वोट देने वाले रिपब्लिकन सांसदों में सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, रैंड पॉल और बिल कैसिडी शामिल थे।
वहीं डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। दो रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति से भी प्रस्ताव को पारित होने में मदद मिली। इनमें पूर्व सीनेट बहुमत नेता मिच मैककॉनेल भी शामिल थे, जो हाल ही में अज्ञात कारणों से अस्पताल में भर्ती हुए थे।
राष्ट्रपति वीटो नहीं कर पाएंगे
सांसदों ने इस प्रस्ताव को "समवर्ती प्रस्ताव" के रूप में पारित किया है। इसके कारण इसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजने की आवश्यकता नहीं होगी और ट्रंप औपचारिक रूप से इसे वीटो नहीं कर सकेंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस इसकी कानूनी वैधता को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
युद्ध में जान-माल का भारी नुकसान
डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई। संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स के अनुसार, इस संघर्ष में 14 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और अमेरिकी करदाताओं पर अरबों डॉलर का बोझ पड़ा है।
चक शूमर ने ट्रंप की ईरान नीति की आलोचना की
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने बहस के दौरान ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सीनेट अब तक ट्रंप के सैन्य अभियान को सीमित करने के लिए 10 बार मतदान कर चुकी है।
उन्होंने कहा, "वर्षों तक ट्रंप ने ईरान पर अधिकतम दबाव डालने का वादा किया, लेकिन अंत में उन्होंने अमेरिकी जनता को अधिकतम भ्रम, अधिकतम अराजकता और अधिकतम लागत दी। उनका यह विनाशकारी युद्ध अमेरिकी इतिहास की सबसे खराब विदेश नीति पहलों में से एक के रूप में याद किया जाएगा।"
शूमर का कहना था कि इस संघर्ष ने संसाधनों को खत्म किया है और देश तथा विदेश दोनों जगह अनिश्चितता पैदा की है।
युद्धविराम वार्ताओं पर बढ़ा दबाव
यह मतदान ऐसे समय हुआ जब व्हाइट हाउस एक नाजुक स्थिति का सामना कर रहा है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस प्रारंभिक समझौते को औपचारिक समझौते में बदलने के लिए वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। पिछले सप्ताह नेताओं ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते से एक नाजुक युद्धविराम लागू हुआ और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिनों की अवधि शुरू हुई।
पुनर्निर्माण योजना पर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद
कई रिपब्लिकन नेता ट्रंप की योजना के कुछ हिस्सों का विरोध कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता ईरान के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष को लेकर है। रूढ़िवादी नेताओं का मानना है कि यह राशि बहुत अधिक है।
उन्होंने इसकी तुलना 2015 में बराक ओबामा प्रशासन द्वारा लौटाए गए 1.7 अरब डॉलर से की है, जिसकी उस समय रिपब्लिकनों ने कड़ी आलोचना की थी। इस नए प्रस्ताव ने पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ा दिए हैं।
पेंटागन ने मांगा 80 अरब डॉलर का आपातकालीन फंड
पेंटागन ने कांग्रेस से 80 अरब डॉलर के आपातकालीन पैकेज की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि इस धन का उपयोग युद्ध में खर्च हुए हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की भरपाई के लिए किया जाएगा।
इस मांग से भविष्य के सैन्य फैसलों पर कांग्रेस का प्रभाव और बढ़ गया है।
युद्ध शक्तियों को लेकर कांग्रेस और व्हाइट हाउस आमने-सामने
व्हाइट हाउस का तर्क है कि 1973 का वॉर पावर्स रेजोल्यूशन असंवैधानिक है। प्रशासन का कहना है कि युद्धविराम लागू होने के कारण अमेरिकी सेना सक्रिय युद्ध में शामिल नहीं है। लेकिन प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि युद्ध से जुड़े फैसलों का अधिकार कांग्रेस के पास होना चाहिए।
टिम केन ने पत्रकारों से कहा, "कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति युद्ध की घोषणा करने की है, राष्ट्रपति की नहीं।"
रिपब्लिकन समर्थन जुटाने की कोशिश में ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को कैपिटल हिल जाकर रिपब्लिकन सीनेटरों से बंद कमरे में बैठक करेंगे। उनका उद्देश्य अपनी ईरान नीति के लिए समर्थन मजबूत करना और पार्टी के भीतर बढ़ते विरोध को शांत करना है।
सीनेट में हुआ यह मतदान कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। साथ ही, यह भी दिखाता है कि ईरान संघर्ष में अमेरिका की भविष्य की भूमिका को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं।
