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रूस के साथ सीधे संवाद को लेकर EU नेता बंटे, नहीं बन सकी सहमति
यूरोपीय संघ (EU) के नेता रूस के साथ प्रत्यक्ष संवाद चैनल खोलने पर सहमति बनाने में विफल रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के ठहराव के बीच मॉस्को के साथ संबंधों को लेकर सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं।

यूरोपीय संघ (EU) के नेता इस बात पर सहमति बनाने में विफल रहे कि यदि यूक्रेन में रूस के युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों में प्रगति होती है, तो क्या यूरोपीय हितों की रक्षा के लिए मॉस्को के साथ एक संचार चैनल स्थापित किया जाना चाहिए।

यह मुद्दा दो दिवसीय यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा का विषय रहा, जहां नेताओं ने इस बात पर विचार किया कि क्या क्रेमलिन के साथ प्रत्यक्ष संपर्क संभावित शांति वार्ताओं की तैयारी में मदद कर सकता है। हालांकि, सदस्य देशों के बीच मतभेदों के कारण कोई साझा निर्णय नहीं लिया जा सका।

एंटोनियो कोस्टा ने मॉस्को के साथ संवाद चैनल की वकालत की

शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले एंटोनियो कोस्टा ने अपने कार्यालय को क्रेमलिन के साथ संपर्क स्थापित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने का निर्देश दिया था। उन्होंने रूसी अधिकारियों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति का भी प्रस्ताव रखा।

कोस्टा ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य अमेरिका के नेतृत्व में चल रही वार्ता प्रक्रिया का विकल्प बनना या उससे प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कूटनीतिक प्रगति होती है, तो यूरोप के हितों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रयासों को अब तक सीमित सफलता मिली है।

रूस के साथ प्रत्यक्ष संपर्क पर यूरोपीय संघ में बहस

हाल के महीनों में यूरोप में इस बात पर चर्चा तेज हुई है कि क्या यूरोपीय संघ को रूस के साथ संपर्क के लिए किसी विशेष दूत या मध्यस्थ की नियुक्ति करनी चाहिए। कई यूरोपीय नेता इस विचार को लेकर संदेह में हैं और उनका मानना है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सार्थक वार्ता में शामिल होने के इच्छुक नहीं होंगे।

इसी कारण अधिकांश यूरोपीय देशों ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया है कि किसी भी शांति समझौते से पहले रूस को कौन-कौन सी रियायतें देनी होंगी।

चेक प्रधानमंत्री ने एकजुटता की कमी को रेखांकित किया

शिखर सम्मेलन के बाद चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिश ने स्वीकार किया कि नेता अपने मतभेद दूर नहीं कर सके। उन्होंने कहा, “यूरोप इस बात पर भी सहमत नहीं हो पा रहा है कि वार्ता होगी या नहीं और यदि होगी तो उसका नेतृत्व कौन करेगा।”

उनकी टिप्पणी ने मॉस्को के साथ भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर यूरोपीय संघ के भीतर मौजूद विभाजन को उजागर किया।

आयरलैंड ने रूस के साथ संवाद का समर्थन किया

आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन ने कोस्टा के प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि किसी भी संभावित शांति वार्ता का मुख्य आधार यूक्रेन और रूस के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “कल रात यह पूरी तरह स्पष्ट था कि किसी भी वार्ता का पहला और प्रमुख पक्ष यूक्रेन और रूस ही होंगे, लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि रूस बातचीत की मेज पर आने के लिए तैयार है।”

क्रेमलिन ने यूरोप के साथ बातचीत के लिए दिखाई तत्परता

रूस ने संकेत दिया कि यदि यूरोपीय देशों का दृष्टिकोण बदले, तो वह यूरोप के साथ फिर से संवाद के लिए तैयार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, “हम संपर्क के लिए तैयार हैं। इन संपर्कों को खत्म करने या पूरी तरह समाप्त करने की पहल हमने नहीं की थी।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि यूरोपीय नेता दबाव और अल्टीमेटम की नीति को छोड़ दें, तो मॉस्को वार्ता का स्वागत करेगा। पेस्कोव ने कहा, “यदि ऐसी ताकतें सामने आती हैं जो रूस के साथ संवाद फिर से शुरू करने की आवश्यकता को समझती हैं, न कि उसे उपदेश देने या अल्टीमेटम जारी करने की, तो राष्ट्रपति पुतिन और रूसी पक्ष निश्चित रूप से इसके लिए तैयार होंगे।”

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने मजाक में कोस्टा को मॉस्को भेजने की बात कही

शिखर सम्मेलन के समापन के दौरान बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डे वेवर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यूरोप की ओर से रूस के साथ बातचीत के लिए एंटोनियो कोस्टा को भेजा जा सकता है।

उन्होंने हंसते हुए कोस्टा से हाथ मिलाते हुए कहा, “मैं अभी आपके बारे में बात कर रहा था, एंटोनियो। मैं आपकी तारीफ कर रहा था और कह रहा था कि केवल आप ही हमारा प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और हम आपको मॉस्को भेजेंगे।”

हालांकि यह टिप्पणी मजाक में कही गई थी, लेकिन इससे यह संकेत मिला कि यूरोपीय संघ में रूस के साथ सीधे संपर्क के लिए किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति पर चर्चा जारी है।

एस्टोनिया ने तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका का विरोध किया

रूस की गतिविधियों को लेकर सबसे अधिक चिंतित यूरोपीय देशों में शामिल एस्टोनिया ने यूरोप द्वारा तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाने के विचार का विरोध किया। एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गस त्साहकना ने कहा कि यूरोपीय संघ को दोनों पक्षों के बीच तटस्थ मध्यस्थ बनने के बजाय यूक्रेन की स्थिति को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “यूरोप को तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभानी चाहिए, बल्कि यूक्रेन को मजबूत बनाकर क्रेमलिन को गंभीर वार्ता के लिए मजबूर करना चाहिए।” उनका रुख पूर्वी यूरोप के कई देशों की व्यापक चिंताओं को दर्शाता है, जिनका मानना है कि कूटनीति यूक्रेन के समर्थन की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

रूस को लेकर साझा रणनीति बनाने में संघर्ष कर रहा यूरोपीय संघ

इस शिखर सम्मेलन ने दिखाया कि रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर साझा रणनीति तैयार करना यूरोपीय संघ के लिए कितना कठिन साबित हो रहा है। जहां कुछ नेताओं का मानना है कि यदि शांति वार्ताएं आगे बढ़ती हैं तो मॉस्को के साथ संवाद उपयोगी हो सकता है, वहीं अन्य नेताओं का कहना है कि यूरोप को यूक्रेन का समर्थन जारी रखते हुए रूस पर दबाव बनाए रखना चाहिए।

फिलहाल, यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर विभाजित बना हुआ है और इस बात पर कोई सहमति नहीं बन पाई है कि भविष्य में संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में मॉस्को के साथ प्रत्यक्ष संवाद की क्या भूमिका होनी चाहिए।