केंद्र सरकार ने मंगलवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा करने के लिए सहमति व्यक्त की है। यह फैसला विपक्षी दलों की बढ़ती मांगों के बाद लिया गया। सरकार ने यह भी पुष्टि की कि अगले मंगलवार को चुनावी सुधारों पर व्यापक चर्चा के लिए समय निर्धारित किया जाएगा।
यह कदम केंद्र के पहले के रुख से अलग था, जब वह बहस के लिए किसी निश्चित तारीख पर प्रतिबद्ध होने से बच रहा था।
विपक्ष की मांगों का असर
दिन की शुरुआत में ही विपक्षी नेताओं ने संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया। वे मतदाता सूची पुनरीक्षण पर तुरंत चर्चा चाहते थे। उनका कहना था कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण मताधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, प्रक्रिया कैसे चल रही है—इस पर स्पष्टता जरूरी है।
लगातार विरोध के बीच सरकार विपक्ष की मांगों के करीब आई और आखिरकार चर्चा की तारीख तय करने पर सहमत हो गई।
खड़गे ने देरी की आलोचना की
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना किसी उचित कारण के चर्चा को टाल रही है।
उन्होंने इस देरी को “देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र के लिए हानिकारक” बताया। उनका कहना था कि सरकार जिम्मेदारी लेने से बच रही है। खड़गे के अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण का गहरा असर है, इसलिए संसद में इस पर खुलकर चर्चा होना जरूरी है।
लोकतंत्र और मताधिकार को लेकर चिंता
विपक्ष को आशंका है कि विशेष गहन पुनरीक्षण का असर मतदाता सूची में नाम शामिल रखने पर पड़ सकता है। उन्हें डर है कि कई असली वोटरों के नाम सूची से हट सकते हैं। उनका कहना है कि यह लोकतंत्र को कमजोर कर सकता है।
इसी कारण वे प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
अब जब सरकार चर्चा के लिए तैयार हो गई है, तो सभी की नजरें अगले हफ्ते होने वाली बहस पर होंगी। कई लोगों को उम्मीद है कि इससे स्थिति स्पष्ट होगी और चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बहाल होगा।
