संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, 1 दिसंबर से शुरू हो रहा है। केंद्र और विपक्ष सीधी भिड़ंत के लिए तैयार हैं। दो मुद्दे सदन में हावी रहेंगे — गांधी परिवार के खिलाफ नेशनल हेराल्ड FIR और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मामला।
तृणमूल कांग्रेस, DMK और समाजवादी पार्टी अपना विरोध तेज करेंगी। वे संसद के अंदर मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा उठाएँगी और बाहर भी प्रदर्शन जारी रखेंगी।
विपक्ष ने SIR पर चिंता जताई
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है। उनका कहना है कि केंद्र चुनाव आयोग को प्रभावित कर रहा है। वे मतदाता सूची पुनरीक्षण में गंभीर अनियमितताओं का भी आरोप लगाते हैं।
पहले उन्होंने सड़कों पर विरोध किया, अब वे संसद के भीतर सरकार को चुनौती देने की तैयारी में हैं।
छोटा सत्र, बड़ी चुनौतियाँ
शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर को समाप्त होगा। यह बहुत छोटा है। ऐसे में लगातार व्यवधान कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार 10 बड़े विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जिनका संबंध परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, कॉरपोरेट कानून और प्रतिभूति बाजार से है।
इसकी तैयारी के लिए वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक 26 नवंबर को राजनाथ सिंह के आवास पर हुई। उन्होंने सरकारी रणनीति पर चर्चा की। वहीं, किरेन रिजिजू ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई और सुचारु व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग मांगा।
सरकार ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा चाहती है
सरकार ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा चाहती है। वह इसके पूर्ण पाठ पर बहस कराना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फिर यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 1937 में इसकी कई पंक्तियाँ हटा दीं, जिससे “विभाजन के बीज” पड़े।
केंद्र का बयान — SIR पर कोई बहस नहीं
केंद्र ने साफ कर दिया है कि संसद में SIR पर बहस नहीं होगी।
उसका कहना है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है। इस पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती। वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देता है और दावा करता है कि चुनाव आयोग कोर्ट के मार्गदर्शन में काम कर रहा है।
सरकार ने बिहार में NDA की बड़ी जीत को भी तर्क के रूप में पेश किया, यह कहते हुए कि मतदाता SIR को राजनीतिक मुद्दा नहीं मानते।
TMC, DMK और SP पीछे हटने को तैयार नहीं
तृणमूल कांग्रेस आक्रामक रुख अपनाएगी। उसके नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर आरोप लगाया कि SIR का इस्तेमाल मतदाता सूची से छेड़छाड़ के लिए हो रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बूथों की संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ाने का भी आरोप लगाया। राज्य में अगले साल चुनाव होने हैं।
बंगाल में बीजेपी ने अपना अभियान तेज कर दिया है, जिससे ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने SIR को “साज़िश” कहा है।
तमिलनाडु में भी तनाव बढ़ रहा है। DMK ने केंद्र पर पुनरीक्षण प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप लगाया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है और संसद में इसे जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी कर रही है।
और भी मुद्दे सामने आएँगे
विपक्ष सरकार को इन मुद्दों पर भी घेरने की तैयारी में है:
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परमाणु ऊर्जा सुधार
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भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक
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चंडीगढ़ संविधान संशोधन
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बेरोज़गारी
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दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण
इन मुद्दों पर भी टकराव बढ़ने की संभावना है।
सर्वदलीय बैठक में क्या हुआ?
SIR सर्वदलीय बैठक में मुख्य मुद्दा बना रहा। SP और TMC ने चर्चा की मांग की। वहीं JD(U) नेता संजय झा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पिछला सत्र “SIR की वजह से ठप हो गया था।” RJD नेता मनोज झा ने इस पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सबसे छोटा सत्र है और सरकार “दिलचस्पी नहीं रखती और इसलिए सत्र को पटरी से उतार रही है।”
उन्होंने कहा, “हमने दिल्ली धमाके पर चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार नहीं चाहती। दूसरी बात, हम SIR, जलवायु और अर्थव्यवस्था पर चर्चा चाहते हैं। हमारे मजदूरों की सुरक्षा नहीं है। बाढ़ प्रबंधन पर भी चर्चा ज़रूरी है। हमारी विदेश नीति की विफलताएँ भी संबोधित की जानी चाहिए, क्योंकि यह अन्य देशों की मांगों के हिसाब से बनाई जा रही है।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष एकजुट है और एक संयुक्त रणनीति बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में होगी।
