बहरीन ने अपने और कुवैत पर किए गए ईरान के ताज़ा मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है। बहरीन के अनुसार, दोनों देशों ने ईरान द्वारा दागी गई सात मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को तब तक मंजूरी नहीं देगा, जब तक उसमें ईरानी अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा सुनिश्चित न हो जाए। इस बीच परमाणु, सैन्य और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेदों के कारण दोनों देशों के बीच वार्ता ठप बनी हुई है।
ईरान ने कहा कि परमाणु वार्ताओं और समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच आईआरजीसी की सुरक्षा में 28 वाणिज्यिक जहाजों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया।
अमेरिका और ईरान प्रस्तावित युद्धविराम विस्तार और शांति समझौते को लेकर अब भी मतभेदों में उलझे हुए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत में प्रगति का दावा किया है, जबकि तेहरान ने कहा है कि अभी तक किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है।
ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईरान के तेल व्यापार से जुड़ी किसी भी संस्था या कंपनी को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान युद्धविराम को बढ़ाने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी रखे हुए हैं।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मॉस्को सुरक्षा मंच में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया और रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी की पुनः पुष्टि की।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी भी जारी है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रस्तावित युद्धविराम तथा परमाणु समझौते को मंजूरी देने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है।
व्हाइट हाउस ने एक विवादास्पद एलियन-थीम वाली आव्रजन वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें गिरफ्तारी के आंकड़े, इंटरएक्टिव मैप्स दिखाए गए हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अवैध आव्रजन के खिलाफ सख्त कार्रवाई को बढ़ावा दिया गया है।
कुवैत ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने शत्रुतापूर्ण मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुए ताजा हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि खाड़ी अरब देश औपचारिक रूप से इज़राइल को मान्यता नहीं देते और अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल नहीं होते, तो वह ईरान शांति समझौते को छोड़ सकते हैं।