ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अमेरिकी क्षेत्र है। उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए यह बयान दिया, जबकि तेहरान की ओर से उनके दावे का कड़ा विरोध किया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबे समय से जारी तैनाती का भी बचाव किया।
ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका ने कम से कम 45 MQ-9 रीपर ड्रोन खो दिए। इन नुकसानों से अमेरिकी करदाताओं पर 1.3 अरब डॉलर से अधिक का बोझ पड़ सकता है और पहले से कम हो चुके अमेरिकी हथियार भंडार पर दबाव और बढ़ सकता है।
ईरान का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर ओमान के साथ समझौते के करीब है, लेकिन इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग को फिर से खोलने से पहले अमेरिका से व्यापक रियायतों की मांग कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति कभी नहीं देगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकल्प लिया है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले जारी रखेगा, जब तक तेहरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुवैत, होर्मुज जलडमरूमध्य और गाजा में नए हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा दिया है।
सऊदी अरब इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ अमेरिका के हमलों के साथ ईरान संघर्ष में शामिल हो गया है। हालांकि, वह अपने तेल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना चाहता है और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध से बचने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका द्वारा हमले रोकने के बाद ईरान ने फिर से बातचीत शुरू करने का अनुरोध किया। करीब दो हफ्तों तक बढ़ते संघर्ष के बाद दोनों देशों ने कूटनीति का रास्ता अपनाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और सैन्य विकल्प खुले रखे हुए है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन ने ईरानी ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए हैं।
लाल सागर में हूती मिसाइल से सऊदी तेल टैंकर के प्रभावित होने और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार 12वीं रात हमले किए जाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों में भी तेजी आई है।