अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि उसका तेल भंडारण लगभग अपनी अधिकतम क्षमता के करीब पहुंच चुका है। इस स्थिति ने उसे पुराने तेल टैंकरों का दोबारा उपयोग करने के लिए मजबूर कर दिया है और जल्द ही उत्पादन में कटौती पर विचार करने की नौबत आ सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान के बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।