अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के खिलाफ आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोकने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ दुर्लभ द्विदलीय चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह भविष्य में ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मिलना चाहेंगे और लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियानों को लेकर बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई तीखी फोन बातचीत की भी पुष्टि की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लेबनान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच चर्चा सक्रिय रूप से जारी है।
मार्को रुबियो ने एक बार फिर अमेरिकी दावे को दोहराया कि वॉशिंगटन ने 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त कराने में मदद की थी, जबकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्धविराम दोनों देशों के बीच सीधे द्विपक्षीय वार्ता के जरिए हासिल किया गया था।
ईरान के IRGC ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों की जिम्मेदारी ली, जबकि कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने शत्रुतापूर्ण मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया।
ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को तब तक मंजूरी नहीं देगा, जब तक उसमें ईरानी अधिकारों की पूरी तरह से रक्षा सुनिश्चित न हो जाए। इस बीच परमाणु, सैन्य और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेदों के कारण दोनों देशों के बीच वार्ता ठप बनी हुई है।
ईरान ने कहा कि परमाणु वार्ताओं और समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका के साथ जारी तनाव के बीच आईआरजीसी की सुरक्षा में 28 वाणिज्यिक जहाजों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार किया।
खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले 13 जहाजों को बाहर निकालने के लिए प्राथमिकता अभियान शुरू किया है।
भारत का एआई-संचालित लड़ाकू ड्रोन ‘काल भैरव’ पुर्तगाल में निर्मित किया जाएगा, जो भारत के वैश्विक रक्षा निर्यातक और स्वायत्त सैन्य प्रौद्योगिकी के अग्रणी देश बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत और अमेरिका एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, वार्ता का केवल 1 प्रतिशत हिस्सा शेष है, जबकि दोनों देश आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।