अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर अपने रक्षा मंत्री और देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी को ईरान युद्ध के घटनाक्रम के लिए जवाबदेह ठहराने पर विचार कर रहे हैं। राष्ट्रपति मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं।
द टाइम्स ऑफ इज़राइल के अनुसार, जिसने द अटलांटिक की एक रिपोर्ट का हवाला दिया है, ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के प्रदर्शन पर चर्चा की है।
ये चर्चाएं ऐसे समय में हो रही हैं, जब राष्ट्रपति लंबे समय से जारी संघर्ष को लेकर लगातार निराश होते जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप को उम्मीद थी कि मध्यावधि चुनावों से काफी पहले ही युद्ध समाप्त हो जाएगा।
इस बीच, ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संघर्ष के अगले कदमों को लेकर मतभेद नजर आ रहे हैं। नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका ईरान पर नए हमले शुरू करे, जबकि ट्रंप कथित तौर पर कूटनीतिक बातचीत को और समय देने के पक्ष में हैं।
जारी युद्ध ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने राजनीतिक चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों ने अमेरिकी नागरिकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है।
ट्रंप ने हेगसेथ और शीर्ष सैन्य जनरल के प्रदर्शन की समीक्षा की
द अटलांटिक के अनुसार, ट्रंप के प्रशासन से बाहर रहने वाले दो करीबी लोगों ने बताया कि राष्ट्रपति अपने सलाहकारों से हेगसेथ और जनरल केन के प्रदर्शन के बारे में सवाल कर रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है कि इन दोनों अधिकारियों को तत्काल पद से हटाए जाने का खतरा है।
हेगसेथ, जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक हैं, कथित तौर पर व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारियों का समर्थन खो चुके हैं। उन पर यह आरोप भी लगा है कि उन्होंने युद्ध की प्रगति को लेकर ट्रंप को जरूरत से ज्यादा सकारात्मक और आशावादी जानकारी दी।
रक्षा मंत्री के प्रदर्शन पर उठ रहे सवालों के बीच उन्होंने सेना के लेफ्टिनेंट जनरल ब्रेट सिल्विया को पद से हटा दिया था। सिल्विया पेंटागन के वरिष्ठ सैन्य योजनाकार थे।
सिल्विया के जाने के बाद जनरल केन के कार्यालय ने शुरुआत में एक बयान जारी कर उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद दिया था। हालांकि, बाद में कार्यालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उस बयान में उनके पद छोड़ने के पीछे की परिस्थितियों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया था।
ईरान पर नए सैन्य हमले को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू में मतभेद
युद्ध के भविष्य को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद कथित तौर पर सप्ताहांत में हुई एक तनावपूर्ण फोन बातचीत के दौरान सामने आए। एक्सियोस के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री ने ट्रंप से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने का आग्रह किया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते थे कि कूटनीतिक प्रयासों को परिणाम देने के लिए कुछ और समय दिया जाए।
ट्रंप ने रविवार को पुष्टि की कि उन्होंने नेतन्याहू से बातचीत की थी। उन्होंने इस बातचीत को अच्छा बताया और स्वीकार किया कि ईरान उन मुद्दों में शामिल था, जिन पर चर्चा हुई थी। हालांकि, उन्होंने बातचीत के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी।
फिलहाल बातचीत को प्राथमिकता देने के बावजूद ट्रंप ने तेहरान पर एक बार फिर सैन्य हमले करने की संभावना से इनकार नहीं किया है। शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है। हालांकि, उन्होंने बातचीत में साझेदार के रूप में तेहरान की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
ट्रंप ने विशेष रूप से 'पिकऐक्स माउंटेन' का जिक्र किया। यह ईरान का एक संदिग्ध परमाणु-संबंधी ठिकाना है, जिस पर संघर्ष के दौरान अब तक हमला नहीं हुआ है। उनकी टिप्पणियों से संकेत मिला कि अमेरिका अभी भी इस ठिकाने पर हमला करने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
कतर ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता तेज की
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कतर के माध्यम से जारी हैं। इजरायली टेलीविजन की खबरों के अनुसार, कतर के अधिकारियों ने लगातार तीन दिनों तक दोहा में ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है।
कतर सरकार ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर के साथ भी संपर्क बनाए रखा है। इन कूटनीतिक संपर्कों से संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका के बावजूद बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी
कूटनीतिक प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय में बनी हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि वॉशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। इन घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति के परिवहन को और मुश्किल बना दिया है।
प्रतिबंधों के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि दो तेल टैंकरों में विस्फोट हो गया। उसके अनुसार, ये टैंकर एक ऐसे समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे, जिसे उसने अनधिकृत बताया था और इस दौरान वे समुद्री बारूदी सुरंगों से टकरा गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के संभावित आर्थिक परिणामों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
