बांग्लादेश और भारत के संबंधों पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली से लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कार्यक्रम के बाद ढाका ने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि भारत ने अपनी जमीन से राजनीतिक गतिविधि करने की अनुमति दी।
हसीना 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत में रह रही हैं। वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपने हटाए जाने की वैधता को खारिज किया और घोषणा की कि वह इस साल के अंत में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं ताकि मौजूदा सरकार को चुनौती दे सकें। उन्होंने ये टिप्पणियां जुलाई क्रांति की दूसरी वर्षगांठ पर कीं, जिसने उनके शासन का अंत किया था।
हसीना की उपस्थिति को लेकर बांग्लादेश ने भारत की आलोचना की
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली से हसीना को मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। मंत्रालय ने इस कदम को “बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान” बताया और कहा कि यह उन लोगों का अपमान है जिन्होंने 2024 के विद्रोह के दौरान अपनी जान गंवाई।
ढाका ने कहा कि कार्यक्रम से पहले ही उसने नई दिल्ली को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया था। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय धरती से हसीना को राजनीतिक बयान देने की अनुमति देना दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध सुधारने के मौजूदा प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकता है।
Bangladesh is outraged that the absconding convicted genocider Sheikh Hasina was allowed this evening to engage in live interaction with the media in New Delhi where she and her henchmen launched venomous vitriol against the State of Bangladesh and her people.
— Ministry of Foreign Affairs (@BDMOFA) August 5, 2026
Dhaka deeply… pic.twitter.com/7BDnAxk5N8
भारत ने कार्यक्रम से खुद को अलग किया
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन या समर्थन सरकार की ओर से नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि एक निजी मीडिया संगठन ने स्वतंत्र रूप से इस कार्यक्रम की व्यवस्था की थी और भारत सरकार ने न तो इसे आयोजित कराया और न ही इसका समर्थन किया।
बांग्लादेश की आलोचना के बावजूद भारत ने अपनी आधिकारिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया है।
बांग्लादेश ने फिर उठाई प्रत्यर्पण की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश ने दोनों देशों के बीच 2013 के प्रत्यर्पण समझौते के तहत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई। बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को उनकी सरकार के अंतिम हफ्तों में प्रदर्शनकारियों पर हुई घातक कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी।
हसीना ने आरोपों को खारिज किया और लौटने का संकल्प दोहराया
लाइव बातचीत के दौरान हसीना ने इस दावे को खारिज किया कि छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन जनता की इच्छा को दर्शाता था। इसके बजाय उन्होंने इसे एक योजनाबद्ध तख्तापलट बताया।
उन्होंने अपनी सरकार के अंतिम महीनों में हुई हिंसा से जुड़े आरोपों से भी इनकार किया। हसीना ने कहा कि वह इस साल के अंत में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं।
शाकिब अल हसन के पैतृक घर पर हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद हमलावरों ने मगुरा जिले में बांग्लादेश के पूर्व क्रिकेट कप्तान और अवामी लीग नेता शाकिब अल हसन के पैतृक घर को निशाना बनाया।
अवामी लीग के अनुसार, शाकिब के प्रसारण के दौरान हसीना के साथ दिखाई देने के तुरंत बाद हमलावरों ने घर पर पेट्रोल बम फेंका और संपत्ति में तोड़फोड़ की। दमकलकर्मी तेजी से मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पा लिया। किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन घर को नुकसान पहुंचा है।
पुलिस ने जांच शुरू की
अवामी लीग ने हमले की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया। वहीं, स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की कि हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
