प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति समझौते के लिए स्विट्जरलैंड में आयोजित होने वाले उच्च-स्तरीय हस्ताक्षर समारोह की योजनाएं कथित तौर पर रद्द कर दी गई हैं। मामले से परिचित कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, 19 जून को प्रस्तावित इस कार्यक्रम में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन अब उनके यात्रा करने की संभावना नहीं है।
औपचारिक सार्वजनिक हस्ताक्षर समारोह के बजाय अब प्रक्रिया एक विस्तृत तकनीकी वार्ता चरण में प्रवेश कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान की अग्रिम टीमें पहले से ही बर्गेनस्टॉक और ज्यूरिख में मौजूद हैं, ताकि इस बदलाव का प्रबंधन किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि अब ध्यान अगले 60 दिनों में कई दौर की तकनीकी वार्ताओं के जरिए लंबित मुद्दों को सुलझाने पर रहेगा, क्योंकि दोनों पक्ष समझौते के ढांचे को और स्पष्ट तथा मजबूत बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्विट्जरलैंड यात्रा रद्द की
कूटनीतिक कार्यक्रमों में बदलाव का असर पाकिस्तान की भागीदारी पर भी पड़ा है। शहबाज शरीफ ने कथित तौर पर अपनी निर्धारित स्विट्जरलैंड यात्रा रद्द कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) से जुड़े प्रमुख उद्देश्यों की पूर्ति हो जाने के बाद इस यात्रा की आवश्यकता नहीं रह गई थी।
अब जबकि वार्ता तकनीकी चरण में प्रवेश कर चुकी है, पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस स्तर पर प्रधानमंत्री की प्रत्यक्ष भागीदारी आवश्यक नहीं है।
पाकिस्तान और ईरान ने भविष्य के सहयोग पर की चर्चा
ये घटनाक्रम हाल ही में शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बीच हुई उच्च-स्तरीय वार्ताओं के बाद सामने आए हैं। इन चर्चाओं के दौरान ईरानी नेतृत्व ने क्षेत्रीय तनाव कम करने के उद्देश्य से किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों में पाकिस्तान के नेतृत्व, विशेष रूप से फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका की सराहना की।
पाकिस्तान ने दोनों देशों के व्यापक सहयोग के तहत ईरान के पुनर्निर्माण प्रयासों में समर्थन देने का भी आश्वासन दिया है। दोनों पक्ष भविष्य में पारस्परिक यात्राओं की व्यवस्था करने पर सहमत हुए हैं, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
तकनीकी चरण तय करेगा अंतिम समझौते का स्वरूप
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, वार्ता का आगामी चरण प्रस्तावित समझौते के तकनीकी पहलुओं और उसके कार्यान्वयन तंत्र पर केंद्रित होगा। एकल हस्ताक्षर समारोह के बजाय अब आने वाले हफ्तों में कई दौर की चर्चाएं होंगी।
सभी सहभागी देशों के अधिकारी चरणबद्ध तरीके से अनसुलझे मुद्दों पर काम करेंगे, ताकि एक व्यावहारिक और स्थायी शांति ढांचे को अंतिम रूप दिया जा सके।