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अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध तनाव के बीच तेल संकट से निपटने के लिए चीन ‘टीपॉट’ रिफाइनरियों का कैसे इस्तेमाल करता है?
ईरान युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए चीन छोटी “टीपॉट” रिफाइनरियों और बड़े तेल भंडार का उपयोग कर रहा है।

ईरान में चल रहे युद्ध को दूसरा महीना शुरू हो चुका है और इसके साथ ही वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। इसके बावजूद चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बड़े झटके से बचाने में काफी हद तक सफल रहा है। इसकी एक बड़ी वजह छोटे स्वतंत्र तेल रिफाइनरियों का नेटवर्क है, जिन्हें “टीपॉट” रिफाइनरी कहा जाता है और जो मुख्य रूप से शानदोंग प्रांत में स्थित हैं।

छोटी रिफाइनरियां निभा रही हैं बड़ी भूमिका

ये टीपॉट रिफाइनरियां निजी स्वामित्व वाली होती हैं और सरकारी बड़ी रिफाइनरियों की तुलना में आकार में छोटी होती हैं। फिर भी वे चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 25 प्रतिशत संभालती हैं।

इन्हें “टीपॉट” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी संरचना अपेक्षाकृत छोटी और कॉम्पैक्ट होती है। बड़ी कंपनियों जैसे सिनोपेक की तुलना में ये रिफाइनरियां मुख्य रूप से चीन के घरेलू बाजार के लिए काम करती हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी से कुछ हद तक बच जाती हैं।

प्रतिबंधित देशों से सस्ता तेल खरीदना

टीपॉट रिफाइनरियां अक्सर ईरान और रूस जैसे देशों से रियायती कीमत पर कच्चा तेल खरीदती हैं। बड़ी सरकारी कंपनियां आमतौर पर ऐसे सौदों से बचती हैं क्योंकि उन्हें अमेरिकी प्रतिबंधों का डर होता है।

असल में, अमेरिकी प्रतिबंधों ने अप्रत्यक्ष रूप से ईरान, रूस और वेनेजुएला को चीन के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना दिया है। ये छोटी रिफाइनरियां वह “जोखिम वाला तेल” खरीदती हैं जिसे बड़ी कंपनियां हाथ लगाने से भी बचती हैं।

चीन ने पहले से बना रखे हैं बड़े तेल भंडार

चीन ने इस तरह के संकट के लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले ही उसने बड़े पैमाने पर तेल का भंडारण कर लिया था।

अनुमान के अनुसार चीन के पास लगभग 1.2 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है। यह भंडार समुद्री मार्ग से होने वाले आयात के लगभग 109 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। इस रणनीति की वजह से चीन कई अन्य देशों की तुलना में आपूर्ति झटकों से बेहतर तरीके से निपट पा रहा है।

संकट के समय “बफर” का काम करती हैं टीपॉट रिफाइनरियां

इन रिफाइनरियों ने सस्ते तेल को बड़ी मात्रा में खरीदकर भंडार बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। जब कीमतें कम थीं तब इन्होंने ईरान और रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा।

विशेषज्ञ अलिसिया गार्सिया-हेरेरो के अनुसार सामान्य समय में ये रिफाइनरियां ईंधन आपूर्ति बढ़ाती हैं, जबकि संकट के समय सस्ते तेल के लिए एक लचीले “बफर” की तरह काम करती हैं। लेकिन जब तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं और छूट खत्म हो जाती है, तो इनके मुनाफे पर दबाव पड़ता है।

छूट कम होने से बढ़ रहा दबाव

अब इन रिफाइनरियों के लिए स्थिति कठिन होती जा रही है। पहले ईरानी तेल ब्रेंट क्रूड से लगभग 11 डॉलर सस्ता मिलता था, लेकिन अब यह अंतर घटकर लगभग 2 डॉलर रह गया है।

उधर वैश्विक तेल कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। इससे टीपॉट रिफाइनरियों के मुनाफे में भारी कमी आ गई है, क्योंकि वे पहले से ही बहुत कम मार्जिन पर काम करती हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार बढ़ती लागत और कमजोर मांग के कारण कुछ रिफाइनरियां उत्पादन धीमा कर रही हैं।

फिलहाल स्थानीय आपूर्ति स्थिर

फिलहाल शानदोंग क्षेत्र में ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। इसका कारण यह है कि रिफाइनरियों ने पहले ही पर्याप्त भंडार जमा कर लिया था।

एक रिफाइनरी अधिकारी के अनुसार, “हमने पहले कुछ भंडार बना लिया था, इसलिए अभी के लिए दबाव ज्यादा नहीं है।” हालिया आंकड़ों के अनुसार रिफाइनरियां लगभग 55 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही थीं, जो पहले से थोड़ा अधिक है।

श्रमिकों और उद्योग पर असर

बढ़ती लागत का असर अब कर्मचारियों पर भी दिखने लगा है। कुछ रिफाइनरियों में ऑर्डर कम हो गए हैं और कामगारों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो कुछ टीपॉट रिफाइनरियां पूरी तरह बंद भी हो सकती हैं।

चीन की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा

अब तक चीन की रणनीति काफी हद तक सफल रही है। उसने छोटी रिफाइनरियों, रियायती तेल और बड़े भंडार के सहारे संकट का सामना किया है। लेकिन यह व्यवस्था सस्ते तेल पर काफी हद तक निर्भर करती है। यदि कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं और छूट खत्म हो गई, तो यह “बफर सिस्टम” कमजोर पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ये टीपॉट रिफाइनरियां बंद हो गईं, तो चीन की ऊर्जा व्यवस्था में एक बड़ा खालीपन पैदा हो सकता है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।