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अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत से जुड़े जहाजों समेत 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट किया
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट किया है, जिनमें भारतीय कंपनियों से जुड़े दो जहाज भी शामिल हैं, जिससे भारत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इनमें दो ऐसे जहाज भी शामिल हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय कंपनियों से जुड़े हैं। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव बढ़ने के बीच यह कदम उठाया गया है। इन जहाजों में भारत स्थित टैंकर महा रूज़ और दिशा शामिल हैं। ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने सोमवार को यह सूची जारी की। प्राधिकरण ने इन 45 जहाजों को नियमों का पालन न करने वाला बताया और उन पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरानी नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम से भारत और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा किया

ब्लैकलिस्ट से संकेत मिलता है कि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अधिक सख्त नियम लागू करने की कोशिश कर रहा है। यह कदम अमेरिका द्वारा ईरान को “इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंधों” की धमकी देने के कुछ ही दिनों बाद आया है। PGSA की सूची के विश्लेषण से पता चलता है कि इन प्रतिबंधों का वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है। सूची में शामिल कई जहाजों के संबंध भारत और अन्य प्रमुख व्यापारिक देशों की कंपनियों से हैं। ब्लैकलिस्ट किए गए अधिकांश जहाजों का संबंध संयुक्त अरब अमीरात में स्थित संस्थाओं से है। कुछ अन्य जहाज कतर, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और माल्टा की कंपनियों या व्यावसायिक हितों से जुड़े हैं। पाकिस्तान के झंडे वाला मर्दान (Mardan) नामक कच्चे तेल का टैंकर भी PGSA की उल्लंघन सूची में शामिल है। एएफपी के अनुसार, जिन जहाजों को ईरान ने जब्त करने की धमकी दी है, उनमें से लगभग एक-तिहाई को फरवरी में शुरू हुए युद्ध के दौरान पहले ही निशाना बनाया जा चुका था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सूची में शामिल करीब 39 जहाज ऐसे कमोडिटी कैरियर हैं, जो मार्च की शुरुआत से कम से कम एक बार होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं।

दो टैंकर भारतीय कंपनियों से जुड़े

ब्लैकलिस्ट में शामिल 14 जहाजों के भारत के साथ वाणिज्यिक या ऊर्जा-परिवहन संबंध हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार दिशा और महा रूज़ ही ऐसे दो जहाज हैं, जिनका स्वामित्व और संचालन भारतीय कंपनियों के पास है। PGSA ने चेतावनी दी है कि ईरानी पारगमन नियमों का उल्लंघन करने के आरोपी जहाजों को गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है। PGSA ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कुछ जहाजों द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरानी नियमों के उल्लंघन को देखते हुए, इन जहाजों को भविष्य में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने पर जुर्माना, जब्ती या पूरी तरह कब्जे में लेने जैसी पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा।” प्राधिकरण ने माल मालिकों को भी सलाह दी कि वे शिपमेंट की व्यवस्था करने से पहले उसकी सूची की जांच करें। PGSA ने कहा, “संभावित समस्याओं से बचने के लिए, गंतव्य तक या मूल स्थान से माल भेजने की व्यवस्था करने वाले माल मालिकों के लिए PGSA की वेबसाइट पर जहाजों की सूची की जांच करना आवश्यक है।” हालांकि, PGSA ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों ने वास्तव में कौन-कौन से विशिष्ट नियमों का उल्लंघन किया था।

यह कदम भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटनाक्रम भारत के लिए संवेदनशील समय में सामने आया है। वॉशिंगटन ने हाल ही में चार भारतीय कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों पर ईरान के साथ कथित कारोबार को लेकर नए द्वितीयक प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन कंपनियों और भारतीय नागरिकों पर ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात करने के आरोप में प्रतिबंध लगाए गए। अमेरिका द्वारा जिन कंपनियों के नाम लिए गए हैं, उनमें पोर्टईज़ पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिवा ओवरसीज़ लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृति‍ज़ इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई से ईरान के साथ व्यावसायिक संबंध रखने वाले भारतीय कारोबारों पर और दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाया

अमेरिका ने इन चार भारतीय कंपनियों पर “ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद, अधिग्रहण, बिक्री, परिवहन या विपणन के लिए जानबूझकर महत्वपूर्ण लेनदेन में शामिल होने” का आरोप लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले तेहरान के खिलाफ एक बड़े नए आर्थिक अभियान की घोषणा की थी। 20 अगस्त को ट्रंप ने इसे ईरान के खिलाफ “अब तक चलाया गया सबसे विनाशकारी आर्थिक अभियान” बताया था। उन्होंने तेहरान को वित्तीय या अन्य प्रकार की सहायता देने वाले देशों को “बहुत बड़े आर्थिक परिणाम” भुगतने की चेतावनी भी दी थी। इस तरह अमेरिकी प्रतिबंध अभियान ने उन देशों और कंपनियों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा कर दी हैं, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखे हुए हैं।

भारत-ईरान व्यापार में आई गिरावट

भारत के ईरान के साथ पारंपरिक रूप से मजबूत वाणिज्यिक संबंध रहे हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी गिरावट आई है। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1.6 अरब डॉलर रहा। यह मार्च 2023 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लगभग 2.3 अरब डॉलर के व्यापार की तुलना में कमी है। नवीनतम घटनाक्रम भारत-ईरान आर्थिक संबंधों पर और दबाव डाल सकते हैं। साथ ही, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर किसी भी तरह की पाबंदी का व्यापक असर हो सकता है, क्योंकि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा परिवहन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।