अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष समाप्त होने के बाद वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को लेकर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा, “ईरान को हराने के बाद, जिसे बहुत बुरी तरह हराया जा रहा है, मैं जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का क्षेत्र घोषित करूंगा।” उनकी इस घोषणा पर भीड़ ने जोरदार तालियों और नारों के साथ प्रतिक्रिया दी।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में यह जलमार्ग ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है। हालांकि, परंपरागत रूप से यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग के रूप में संचालित होता रहा है।
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत के बाद से यह जलडमरूमध्य तनाव का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। संघर्ष के दौरान तेहरान ने इस जलमार्ग से होने वाले आवागमन पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की है।
ईरान चाहता है जहाजों की आवाजाही पर अधिक नियंत्रण
ईरान पहले भी मांग कर चुका है कि कुछ जहाज जलडमरूमध्य से गुजरने से पहले अनुमति लें और उसके तट के अधिक करीब से होकर गुजरें। इस तरह के प्रतिबंधों के कारण इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट आई है। ईरान ने इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की संभावना पर भी विचार किया है।
ट्रंप प्रशासन आम तौर पर ईरान द्वारा इस तरह के शुल्क लगाए जाने की संभावना का विरोध करता रहा है। वहीं, ट्रंप स्वयं यह संकेत दे चुके हैं कि अमेरिका भी शुल्क लगा सकता है।
वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर गुजरती है।
इसलिए किसी भी तरह का व्यवधान पूरे क्षेत्र से बाहर भी असर डाल सकता है। यदि जलडमरूमध्य तक पहुंच सीमित होती है, तो शिपिंग कंपनियों, ऊर्जा बाजारों और तेल तथा गैस के आयात पर निर्भर देशों को बढ़ती अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप की ताजा टिप्पणी ने इस विवाद में एक और नया पहलू जोड़ दिया है, क्योंकि वॉशिंगटन और तेहरान व्यापक टकराव में आमने-सामने बने हुए हैं।
ट्रंप ने यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती का बचाव किया
ट्रंप ने पश्चिम एशिया में यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबे समय से जारी तैनाती को लेकर उठाई जा रही चिंताओं पर भी बात की। अमेरिकी विमानवाहक पोत को कथित तौर पर करीब नौ महीने से इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष में भी इस पोत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एक पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि क्या इस विमानवाहक पोत को बहुत लंबे समय से तैनात किया गया है। ट्रंप ने इस सुझाव को खारिज कर दिया और संकेत दिया कि उनके अनुसार इसकी तैनाती पर्याप्त लंबी नहीं रही है। ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले राष्ट्रपति ने कहा, “बिल्कुल भी पर्याप्त समय नहीं हुआ।”
ट्रंप ने सैन्य परिवारों की चिंताओं को खारिज किया
एक अन्य पत्रकार ने विमानवाहक पोत पर तैनात अमेरिकी सैनिकों की परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। पत्रकार ने कहा कि सैन्यकर्मियों के परिवार जहाज पर मौजूद परिस्थितियों को लेकर चिंतित हैं। ट्रंप ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ने कहा, “नहीं, वे चिंतित नहीं हैं।”
उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब विमानवाहक पोत बढ़ते संघर्ष के बीच क्षेत्र में अपना विस्तारित मिशन जारी रखे हुए है।
एक अन्य विमानवाहक पोत लेगा लिंकन की जगह
ट्रंप ने यह भी कहा कि यूएसएस अब्राहम लिंकन को बदला जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यह विमानवाहक पोत जल्द ही अपनी मौजूदा तैनाती वाली जगह से रवाना होगा और उसकी जगह एक अन्य अमेरिकी विमानवाहक पोत अपना मिशन संभालेगा। उन्होंने कहा, “वह जहाज अभी या बहुत जल्द आगे बढ़ रहा है और उसकी जगह एक बिल्कुल समान प्रकार का दूसरा जहाज ले रहा है।”
प्रस्तावित बदलाव से अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण नौसैनिक मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन को क्षेत्र से वापस जाने का अवसर मिलेगा।
तनाव लगातार बढ़ रहा है
होर्मुज जलडमरूमध्य और USS अब्राहम लिंकन को लेकर ट्रंप की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह जलमार्ग टकराव का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जबकि अमेरिकी सैन्य संसाधनों की लगातार तैनाती पश्चिम एशिया में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के वॉशिंगटन के प्रयासों को दर्शाती है।
ट्रंप का होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में से एक की मौजूदा स्थिति में एक बड़ा बदलाव होगा।
