JUSZnews

NEWS WITHOUT INTERRUPTION

Subscribe
अमेरिका समर्थित रूपरेखा समझौते पर इज़राइल और लेबनान के हस्ताक्षर, युद्धविराम को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
इज़राइल और लेबनान ने युद्धविराम को मजबूत करने के लिए अमेरिका समर्थित एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, हिज़्बुल्लाह द्वारा निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ने) से जुड़े प्रमुख प्रावधानों को खारिज किए जाने के कारण स्थायी शांति की राह में अभी भी बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

इज़राइल और लेबनान ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता से एक रूपरेखा समझौते (फ्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने इसे केवल एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत बताया, लेकिन उनका कहना है कि यह समझौता युद्धविराम (सीज़फायर) को मजबूत करेगा और सीमा पर स्थायी शांति एवं स्थिरता की नींव रख सकता है।

लेबनान की राजदूत नादा मोआवद और इज़राइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने कई दिनों की वार्ता के बाद अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) में अमेरिकी अधिकारियों की मौजूदगी में इस त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।

युद्धविराम लागू कराने में अमेरिका की भूमिका

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर से पहले कहा, "आज हमने एक ऐसी यात्रा का पहला कदम उठाया है जो निश्चित रूप से कठिन होगी, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण, आवश्यक और अनिवार्य कदम है।"

समारोह के बाद रुबियो ने घोषणा की कि अमेरिका लेबनान के लिए एक नए 'मिलिट्री कोऑर्डिनेशन ग्रुप' के माध्यम से इस समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा।अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से तत्काल 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) की मानवीय सहायता देने का भी वादा किया। इसके अलावा, लेबनानी सशस्त्र बलों को मजबूत करने और पूरे लेबनान में सरकारी नियंत्रण स्थापित करने में मदद के लिए 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) से अधिक की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की गई।

हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक दक्षिणी लेबनान में रहेगा इज़राइली सैन्य बल

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि जब तक हिज़्बुल्लाह अपने हथियार नहीं डालता, तब तक इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि इस समझौते के तहत लेबनानी सेना चरणबद्ध तरीके से कुछ क्षेत्रों का नियंत्रण अपने हाथ में लेगी। इसकी शुरुआत दो "पायलट ज़ोन" से होगी, जहां से बाद में इज़राइली सेना हटेगी।

इज़राइल इन इलाकों को एक सुरक्षा बफर ज़ोन मानता है, जिसका उद्देश्य उत्तरी इज़राइल पर भविष्य में हिज़्बुल्लाह के हमलों को रोकना है। इज़राइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा, "ईरान बाहर है, हिज़्बुल्लाह बाहर है और अब इज़राइल तथा लेबनान के बीच शांति का रास्ता खुल गया है।"

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इज़राइल की आगे की सैन्य वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनानी सेना हिज़्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को समाप्त करने में कितनी सफल रहती है। उन्होंने कहा, "जितनी प्रभावी ढंग से लेबनानी सेना हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करेगी और उसके ढांचे को खत्म करेगी, उतनी ही तेजी से हम अतिरिक्त पायलट ज़ोन से हटेंगे और अंततः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, सुरक्षित तथा दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार की गई सीमा तय की जाएगी।"

लेबनान ने संप्रभुता बहाल होने की जताई उम्मीद

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा कि इस समझौते से विस्थापित परिवारों की घर वापसी का रास्ता खुलेगा और देश अपनी पूरी संप्रभुता दोबारा स्थापित कर सकेगा।

उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि लेबनान बाहरी हस्तक्षेप के बिना अपने शहरों और समुदायों का पुनर्निर्माण कर सकेगा। वहीं, लेबनान की राजदूत नादा मोआवद ने भी इस समझौते को कई महीनों के संघर्ष के बाद देश की संप्रभुता बहाल करने की दिशा में "पहला कदम" बताया।

संघर्ष में भारी जन-धन की हानि

ताजा संघर्ष की शुरुआत 2 मार्च को हुई, जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के तुरंत बाद हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर हमले शुरू कर दिए। इसके जवाब में इज़राइल ने लेबनान में व्यापक हवाई और जमीनी सैन्य अभियान चलाया। रिपोर्टों के अनुसार, इस संघर्ष में लेबनान में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हुई और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो गए।

दूसरी ओर, इज़राइल ने इस संघर्ष में कम से कम 32 सैनिकों और चार नागरिकों को खोया है। रॉयटर्स की पहले की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान हिज़्बुल्लाह के कई हजार लड़ाके भी मारे गए, हालांकि संगठन ने अब तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार

समझौते के बावजूद सीमा पर तनाव बना हुआ है। इज़राइल ने दावा किया कि उसकी सेना ने इज़राइली नियंत्रण वाले क्षेत्र के पास सक्रिय हिज़्बुल्लाह के सात सदस्यों को मार गिराया। हालांकि रॉयटर्स इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका।

इस बीच, इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के मंसूरी शहर के ऊपर पर्चे गिराकर लोगों से क्षेत्र खाली करने को कहा। लेबनान के सरकारी मीडिया के अनुसार, ताजा युद्धविराम लागू होने के बाद यह पहला निकासी आदेश था।

एक वरिष्ठ लेबनानी सैन्य अधिकारी ने बताया कि इज़राइल ने हाल ही में मंसूरी को अपने सुरक्षा क्षेत्र में शामिल कर लिया है। हालांकि किसान अभी भी वहां जाते रहे, लेकिन अधिकांश स्थायी निवासी क्षेत्र से दूर रहे। इज़राइली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि पर्चे केवल सुरक्षा चेतावनी के तौर पर जारी किए गए थे।

उन्होंने कहा, "यह इलाका सुरक्षा क्षेत्र के भीतर आता है जहां इज़राइली सैनिक अभियान चला रहे हैं। यह लोगों को नुकसान से बचाने के लिए केवल एक चेतावनी है कि वे इस क्षेत्र में न आएं।"

हिज़्बुल्लाह ने समझौते को किया खारिज

हिज़्बुल्लाह ने समझौते में शामिल निरस्त्रीकरण की शर्तों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। हिज़्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि यदि अमेरिकी समर्थन के साथ लेबनानी सरकार इस समझौते को लागू करने की कोशिश करती है, तो इसका मतलब होगा कि "वे गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहे हैं।"

उन्होंने चेतावनी दी कि हिज़्बुल्लाह अपने हथियार किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा और समझौते की सुरक्षा संबंधी शर्तों का कड़ा विरोध करता रहेगा। उनकी टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद युद्धविराम को स्थायी बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

फिर भी, यह समझौता एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। हालांकि इज़राइल, लेबनान और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों को साझा सीमा पर स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अभी कई कठिन चुनौतियों का सामना करना होगा।