प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि युद्धों का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए ही संभव है। उन्होंने सभी देशों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नाविकों की रक्षा करने का भी आह्वान किया।
मोदी ने यह बात फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान कही। इस सत्र का विषय था, "नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण"। भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया के नेताओं ने साझेदार देशों के रूप में चर्चा में हिस्सा लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सत्र के दौरान मोदी के बगल में बैठे थे।
नाविकों की सुरक्षा पर मोदी का जोर
मोदी ने वैश्विक व्यापार में नाविकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के माध्यम से सभी देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।"
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा, "भारत इन मुद्दों पर सभी साझेदारों के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
Shared my thoughts at the Outreach Session on ‘Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity’ at the G7 Summit in Evian. In a world that is getting more interconnected and interdependent than ever before, this subject becomes all the more vital. But,… pic.twitter.com/NjNddWGtFF
— Narendra Modi (@narendramodi) June 16, 2026
पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत
मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने कहा कि संघर्ष से पहले ही भारी नुकसान हो चुका है। उन्होंने बताया कि कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है और क्षेत्र के मित्र देशों को भी नुकसान उठाना पड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात में आई बाधाओं का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा है।
संवाद ही एकमात्र समाधान
मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते का समर्थन करते हुए कहा, "भारत का दृढ़ विश्वास है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी तनाव और युद्धों का स्थायी समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है।"
उनकी यह टिप्पणी शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप के साथ निर्धारित द्विपक्षीय बैठक से एक दिन पहले आई। इससे पहले दोनों नेताओं ने सत्र शुरू होने से पहले संक्षिप्त अभिवादन किया था। फरवरी 2025 के बाद यह उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।
भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ी चिंता
हाल ही में ओमान के पास हुई एक घटना के बाद समुद्री सुरक्षा का मुद्दा और गंभीर हो गया है। पिछले सप्ताह एक अमेरिकी विमान ने एमटी सेटेबेलो नामक टैंकर पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। यह जहाज उन तीन व्यापारी पोतों में से एक था, जिनमें ओमान तट के पास 65 से अधिक भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे।
इस घटना के बाद भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिका के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को दो बार तलब किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर इस मुद्दे पर चर्चा की। हालांकि अमेरिका ने इस घटना पर खेद व्यक्त नहीं किया और रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ अपनी नाकेबंदी जारी रखेगा।
संघर्ष में 13 भारतीयों की मौत
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर इज़राइली और अमेरिकी हमलों के बाद संघर्ष बढ़ने के बाद से पश्चिम एशिया में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा ने नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार मार्गों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
विश्वास सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति
मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विश्वास के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज देश पहले से कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा, "ऐसे समय में साझेदारियों का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियां तभी सफल होती हैं, जब उनकी नींव में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति खनिज, तकनीक या बाजार नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।"
उन्होंने प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं का दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ भी चेतावनी दी।
वैश्विक विश्वास कमजोर हो रहा है
मोदी ने कहा कि दो विश्व युद्धों के बाद शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कई संस्थानों का निर्माण किया गया था, लेकिन अब उन व्यवस्थाओं पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, "कई पीढ़ियों के योगदान से दशकों में बना विश्वास आज कमजोर हो रहा है। कोविड ने हमें दिखाया कि विश्वास और एकजुटता के दावे कितने खोखले थे।"
उन्होंने आगे कहा, "आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि विश्वास की कमी से जूझ रही है। हमारी साझेदारी का भविष्य इसी विश्वास के निर्माण पर निर्भर करता है।"
मोदी ने रोनाल्ड रीगन का किया जिक्र
मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के प्रसिद्ध कथन "Trust, but verify" का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा, "यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। नई पीढ़ियों के लिए एक विश्वसनीय और नियम-आधारित व्यवस्था स्थापित करना हमारी जिम्मेदारी है, जो नए युग के अनुरूप हो।"
भारत-अमेरिका संबंधों पर बनी हुई है नजर
हालांकि मोदी ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका व्यापारिक मतभेदों को दूर करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
वॉशिंगटन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद दोनों देशों ने मतभेदों को सुलझाने के प्रयास तेज किए हैं। दोनों देश आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
अपने संबोधन के जरिए मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि देशों को आपसी विश्वास मजबूत करना चाहिए, वैश्विक व्यापार मार्गों की रक्षा करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संघर्ष नहीं बल्कि संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
