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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मिसाइल हमले से टैंकर निशाना बना, वैश्विक चिंता बढ़ी
ओमान की खाड़ी में एम/टी सेटेबेलो टैंकर पर अमेरिकी मिसाइल हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिससे भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक विवाद बढ़ गया।

अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला किया। यह कार्रवाई लगभग 60 मौखिक चेतावनियां देने और आठ बार हवाई शक्ति प्रदर्शन करने के बाद की गई थी। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) द्वारा उद्धृत खुफिया और सैन्य रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।

बुधवार को पलाऊ-ध्वज वाले टैंकर एम/टी सेटेबेलो को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) बलों ने निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा था, जिसका उपयोग हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल के परिवहन के लिए किया जा रहा था।

अमेरिका का दावा: दो सप्ताह तक दी गईं लगातार चेतावनियां

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नौसेना और वायुसेना ने लगभग दो सप्ताह तक टैंकर की निगरानी की। इस दौरान जहाज को कई बार वापस लौटने के निर्देश दिए गए, लेकिन चालक दल ने कथित तौर पर चेतावनियों का पालन नहीं किया। बुधवार को कार्रवाई से पहले अमेरिकी बलों ने दो अंतिम प्रत्यक्ष चेतावनियां भी जारी कीं।

सेंटकॉम के अनुसार, चालक दल को इंजन कक्ष खाली करने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया था। समयसीमा समाप्त होने के बाद अमेरिकी विमानों ने इंजन कक्ष पर सटीक निर्देशित हथियारों से हमला किया, जिससे जहाज निष्क्रिय हो गया। हमले के बाद सेंटकॉम ने कहा, “60 दिनों से अधिक समय से लागू नाकाबंदी को अमेरिकी बल सख्ती से लागू करेंगे।”

तीन भारतीय नाविकों की मौत, कई को बचाया गया

हमले के समय जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से 21 लोगों को क्षेत्रीय अधिकारियों ने बचा लिया, जबकि इंजन कक्ष में हुए विस्फोट में तीन नाविकों की मौत हो गई।

मृतकों की पहचान मुख्य अभियंता पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है। इस घटना के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।

भारत ने अमेरिका के समक्ष दर्ज कराया कड़ा विरोध

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस हमले की कड़ी निंदा की और यह मुद्दा सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के समक्ष उठाया।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के खिलाफ भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान गई। वाणिज्यिक जहाजरानी के खिलाफ ऐसी घातक कार्रवाई उचित नहीं है।”

इसके अलावा, विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब कर औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया। भारत ने स्पष्ट किया कि भू-राजनीतिक विवादों में नागरिक समुद्री कर्मियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

जहाज प्रबंधन कंपनी ने अमेरिकी दावे को खारिज किया

टैंकर का संचालन करने वाली दुबई स्थित कंपनी आईओएस मरीन एफजेडई ने अमेरिकी दावों को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि हमला होने से पहले एम/टी सेटेबेलो लगभग दस दिनों से स्थिर खड़ा था और ऐसी कोई गतिविधि नहीं कर रहा था जो सैन्य कार्रवाई को उचित ठहरा सके।

कंपनी ने नाविकों की मौत के लिए अमेरिकी नौसेना को जिम्मेदार ठहराते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। कंपनी के अनुसार, हमले से जहाज को 3.5 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है।

समुद्री संगठन ने भी उठाए सवाल

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को रोका या हिरासत में लिया जाना चाहिए, न कि नागरिक चालक दल के खिलाफ घातक बल का प्रयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी संदेह जताया कि अमेरिकी बल जहाज पर मौजूद लोगों की राष्ट्रीयता से अनभिज्ञ थे।

बढ़ता विवाद और जांच की मांग

इस विवादास्पद समुद्री हमले ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। साथ ही समुद्री सुरक्षा अभियानों में सैन्य बल के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिकी सेना, जहाज प्रबंधन कंपनी और समुद्री संगठनों के परस्पर विरोधी दावों के बीच अब इस घटना की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।