ईरान की अर्धसैनिक बल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), ने बुधवार को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज पर गोलीबारी की। इस घटना में जहाज को नुकसान पहुंचा और मौजूदा तनाव को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गईं, जो पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली संभावित शांति वार्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, यह हमला स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 7:55 बजे हुआ। एजेंसी ने बताया कि गार्ड की एक गनबोट ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाज को निशाना बनाया। राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने या पर्यावरण को नुकसान की कोई खबर नहीं है।
जहाज को भारी नुकसान
UKMTO के मुताबिक, ईरानी नाव ओमान के तट से लगभग 15 समुद्री मील दूर जहाज के करीब आई और फिर गोलीबारी शुरू की। इस हमले में जहाज के ब्रिज को “भारी नुकसान” पहुंचा। हालांकि, जहाज की पहचान और स्वामित्व से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस बीच, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग गतिविधि असामान्य रूप से कम बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार को इस क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि बहुत सीमित रही। फिर भी, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद कुछ ईरानी तेल टैंकर इस क्षेत्र से गुजरने में सफल रहे हैं।
अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज जब्त किए जाने से बढ़ा तनाव
यह ताजा घटना अमेरिका से जुड़े हालिया टकराव के बाद सामने आई है। कुछ दिन पहले, अमेरिकी बलों ने जलडमरूमध्य के पास ‘तूस्का’ नामक एक ईरानी कंटेनर जहाज को रोककर जब्त कर लिया था।
इस कार्रवाई में USS स्प्रुएंस शामिल था, जिसने जहाज को चेतावनी दी थी। इस घटना पर बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जहाज ने आदेशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि बलों ने इंजन कक्ष में “छेद कर” जहाज को रोका। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया।
युद्धविराम बढ़ा, लेकिन गतिरोध जारी
बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
दूसरी ओर, ईरान ने सख्त रुख बनाए रखा है। संयुक्त राष्ट्र में उसके राजदूत आमिर सईद इरावानी ने कथित तौर पर कहा कि तेहरान बातचीत के लिए तभी तैयार है, जब अमेरिका नाकेबंदी हटाए।
कुल मिलाकर, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहां सैन्य कार्रवाइयों और कूटनीतिक मतभेदों ने इस संकट को और जटिल बना दिया है।
