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महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति आगे
भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन ने महाराष्ट्र में जबरदस्त बढ़त बना ली है और 29 में से 24 नगर निगमों में, जिनमें अहम बीएमसी भी शामिल है, वह आगे चल रही है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके महायुति गठबंधन सहयोगियों, जिनमें शिवसेना भी शामिल है, ने शुक्रवार सुबह मतगणना शुरू होते ही महाराष्ट्र भर में मजबूत बढ़त बना ली। शुरुआती रुझानों के अनुसार, गठबंधन राज्य की 29 में से 24 नगर निगमों में आगे चल रहा था। इस सूची में मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई और नागपुर जैसे प्रमुख शहर शामिल थे।

बीएमसी चुनाव में महायुति का दबदबा

उच्च दांव वाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भाजपा–शिवसेना गठबंधन ने निर्णायक बढ़त हासिल की। रुझानों के मुताबिक, महायुति 227 में से 210 वार्डों में आगे थी। गठबंधन बीएमसी पर नियंत्रण के लिए आवश्यक 114 सीटों के बहुमत आंकड़े को पार करता हुआ दिखाई दिया।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठबंधन अधिकांश जिलों में संघर्ष करता नजर आया और मुंबई में भी काफी पीछे रहा।

कांग्रेस को लातूर में जीत, अन्य जगहों पर झटके

कांग्रेस ने अपने सहयोगी वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ मिलकर लातूर में सत्ता हासिल की। हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की बढ़त बढ़ने के साथ ही कांग्रेस अन्य कई प्रमुख नगर निकायों में पिछड़ती दिखी।

मुंबई महानगर क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन

भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति ने मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जो महाराष्ट्र की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। गठबंधन इस क्षेत्र के नौ में से आठ नगर निगमों में आगे रहा।

वसई–विरार में पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के नेतृत्व वाली बहुजन विकास आघाड़ी 65 वार्डों में आगे रही, जबकि भाजपा 48 वार्डों में बढ़त बनाए हुए थी। एमएमआर के शेष आठ नगर निगमों में भाजपा और शिवसेना की आरामदायक जीत की संभावना दिखी।

हालांकि, भाजपा और उसके सहयोगी पांच नगर निगमों में पीछे रहे। इनमें विदर्भ का चंद्रपुर, मराठवाड़ा के लातूर और परभणी, पश्चिम महाराष्ट्र का कोल्हापुर तथा एमएमआर का वसई–विरार शामिल हैं।

मुंबई में बड़े नेताओं के परिजनों की हार

मुंबई में कई प्रमुख नेताओं के परिजनों को हार का सामना करना पड़ा। शिवसेना सांसद रवींद्र वायकर की बेटी वार्ड 73 में शिवसेना (यूबीटी) की प्रत्याशी लोना रावत से हार गईं। शिवसेना नेता श्रीकांत सरवणकर के बेटे समाधान सरवणकर वार्ड 194 से शिवसेना (यूबीटी) के निशिकांत शिंदे से पराजित हुए।

गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली की छोटी बेटी योगिता गवली मध्य मुंबई के वार्ड 207 से हार गईं। पूर्व राज्य मंत्री नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक भी कुर्ला के वार्ड 165 से चुनाव हार गए।

पुणे और पिंपरी–चिंचवड़ में भाजपा आगे

पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) और पिंपरी–चिंचवड़ महानगरपालिका (पीसीएमसी) दोनों में भाजपा ने मजबूत बढ़त बना ली। पुणे में मुख्य मुकाबला भाजपा और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के गठबंधन के बीच रहा।

करीब दोपहर 1 बजे तक के रुझानों के अनुसार, पुणे में 165 में से लगभग 90 सीटों पर भाजपा आगे थी या जीत चुकी थी। एनसीपी गठबंधन लगभग 20 सीटों पर आगे था, जबकि कांग्रेस आठ वार्डों में बढ़त बनाए हुए थी।

पिंपरी–चिंचवड़ में भाजपा 75 वार्डों में आगे रही। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी 40 सीटों पर आगे थी, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 10 वार्डों में आगे बढ़ी।

पीएमसी और पीसीएमसी दोनों पर 2017 से 2022 तक भाजपा का शासन रहा था। बाद में आरक्षण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते चुनाव टलने के कारण प्रशासकों ने कार्यभार संभाल लिया था।

पश्चिम महाराष्ट्र में भाजपा को बढ़त

पश्चिम महाराष्ट्र में भाजपा ने इचलकरंजी, सांगली, सोलापुर और कोल्हापुर सहित कई नगर निकायों में बढ़त बनाई। कोल्हापुर में भाजपा 27 सीटों पर आगे थी, जबकि कांग्रेस 23 सीटों के साथ कड़ी टक्कर में रही। शहर में महायुति सहयोगियों ने मिलकर कांग्रेस के खिलाफ मुकाबला किया।

अहिल्यानगर में मुकाबला बेहद करीबी रहा। ताजा रुझानों के अनुसार, एनसीपी 27 सीटों पर आगे थी, जबकि भाजपा 25 सीटों के साथ उसके करीब बनी हुई थी।