वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने व्हाइट हाउस में एक निजी मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक प्रस्तुत किया। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि बंद दरवाज़ों के पीछे ट्रंप से मुलाकात के बाद उन्होंने यह प्रतीकात्मक कदम उठाया।
उनके बयान के तुरंत बाद नोबेल शांति पुरस्कार के आयोजकों ने एक स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि भले ही भौतिक पदक को किसी और को दिया जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उपाधि बदली नहीं जा सकती।
आयोजकों ने X पर लिखा, “एक बार नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद उसे न तो रद्द किया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही किसी और को स्थानांतरित किया जा सकता है। यह निर्णय अंतिम होता है और हमेशा के लिए मान्य रहता है।”
उन्होंने आगे कहा, “पदक का स्वामित्व बदल सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उपाधि नहीं बदल सकती।”
पदक का स्वामित्व बदल सकता है, उपाधि नहीं
इसी संदेश में नोबेल समिति ने स्पष्ट किया कि अतीत में नोबेल पदकों का स्वामित्व बदला है, लेकिन इससे यह कभी नहीं बदला कि पुरस्कार आधिकारिक रूप से किसे मिला था।
उन्होंने पहले के उदाहरणों का भी उल्लेख किया। इनमें पत्रकार दिमित्री मुरातोव का मामला शामिल है, जिन्होंने यूक्रेन युद्ध के शरणार्थियों के लिए धन जुटाने हेतु अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक नीलाम किया था। समिति ने यह भी बताया कि नोबेल पीस सेंटर में प्रदर्शित पदक मूल रूप से नॉर्वे के पहले नोबेल शांति पुरस्कार विजेता क्रिश्चियन लूस लांगे का था, जो केवल उधार पर रखा गया है।
मुलाकात के बाद ट्रंप की प्रतिक्रिया
मुलाकात के बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में मचाडो का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा, “आज वेनेज़ुएला की मारिया कोरीना मचाडो से मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात थी। वह एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने बहुत कुछ झेला है। मारिया ने मेरे द्वारा किए गए कार्यों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार प्रस्तुत किया। यह आपसी सम्मान का एक सुंदर संकेत है। धन्यवाद, मारिया!”
बाद में मचाडो ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने यह कदम “हमारी स्वतंत्रता के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण की मान्यता में” उठाया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने औपचारिक रूप से पदक स्वीकार किया या नहीं।
इस कदम के पीछे राजनीतिक संदर्भ
यह मुलाकात उस समय हुई जब लगभग दो सप्ताह पहले अमेरिकी बलों ने कराकास पर हमलों के बाद वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था। मचाडो को पिछले वर्ष मादुरो के “क्रूर, सत्तावादी शासन” के खिलाफ संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
मादुरो को हटाए जाने के बाद कई विपक्षी समर्थकों को उम्मीद थी कि ट्रंप मचाडो को वेनेज़ुएला की नई नेता के रूप में मान्यता देंगे। हालांकि ट्रंप ने इसके बजाय मादुरो की सहयोगी डेल्सी रोड्रिगेज का समर्थन किया, जिन्हें बाद में कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई। ऐसे में कई विश्लेषक मचाडो के इस कदम को ट्रंप का राजनीतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
