सऊदी अरब इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ अमेरिका के हमलों के साथ ईरान संघर्ष में शामिल हो गया है। हालांकि, वह अपने तेल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना चाहता है और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध से बचने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने कैस्पियन सागर में अपने वाणिज्यिक जहाज पर हमला करने का आरोप लगाते हुए यूक्रेन को जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। कथित हमले को लेकर बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने यह चेतावनी दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और सैन्य विकल्प खुले रखे हुए है। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन ने ईरानी ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले किए हैं।
लाल सागर में हूती मिसाइल से सऊदी तेल टैंकर के प्रभावित होने और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार 12वीं रात हमले किए जाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। इस घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों में भी तेजी आई है।
ईरान ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा हमलों की लगातार सातवीं रात के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों में विस्फोट हो गया। इससे संघर्ष और गहरा गया है और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
ईरान का कहना है कि अमेरिका के हमलों में कम से कम 38 लोगों की मौत हुई और कई प्रांतों में नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि वॉशिंगटन का कहना है कि इन हमलों का निशाना IRGC की सैन्य सुविधाएं थीं।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर हमले किए। दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है, हालांकि वॉशिंगटन ने कहा है कि कूटनीतिक बातचीत का विकल्प अभी भी खुला है।
ईरान ने कैंसर अस्पताल के पास हुए कथित "बर्बर हमले" के लिए अमेरिका पर आरोप लगाया, पूरे क्षेत्र में सैन्य जवाबी कार्रवाई तेज कर दी और चेतावनी दी कि यदि तनाव बढ़ा तो वह व्यापक हमले करेगा। इस बीच, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और गहराता जा रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर एक और दौर के हवाई हमले पूरे किए, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले जारी रखे। वहीं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर गहराते संकट ने पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी दोबारा लागू किए जाने के बाद ईरान ने पश्चिम एशिया से होने वाले तेल और गैस निर्यात में व्यवधान पैदा करने की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम से वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है।