एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन से पहले खुफिया चेतावनी मिलने के बाद सऊदी अरब कथित तौर पर हाई अलर्ट पर है। चेतावनी में हूती विद्रोहियों और ईरान से जुड़े इराकी मिलिशिया द्वारा संभावित समन्वित हमलों की आशंका जताई गई है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जो गहरे सैन्य सहयोग के जरिए पश्चिम एशिया के सुरक्षा परिदृश्य को बदल सकता है।
सऊदी अरब इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ अमेरिका के हमलों के साथ ईरान संघर्ष में शामिल हो गया है। हालांकि, वह अपने तेल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना चाहता है और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध से बचने की कोशिश कर रहा है।
संयुक्त अरब अमीरात 1 मई से ओपेक से बाहर हो जाएगा और सऊदी अरब के साथ बढ़ते तनाव तथा वैश्विक ऊर्जा झटके के बीच तेल उत्पादन पर अधिक नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से पश्चिम एशिया संघर्ष पर बातचीत की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित शिपिंग मार्गों के महत्व पर जोर दिया गया।