हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमले का आरोप लगाते हुए अमेरिका ने ईरान पर तीसरे दौर के सैन्य हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन उन्होंने युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा कर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए सिरे से हमले किए हैं और कतर ने तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास तेज कर दिए हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने सैन्य अभियानों पर अस्थायी रोक लगाने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। ताजा मिसाइल हमलों और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बावजूद इस कदम से कूटनीतिक समाधान की नई उम्मीद जगी है।
अमेरिका और ईरान के बीच ताज़ा सैन्य संघर्षों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक शिपिंग की बहाली को बाधित कर दिया है। इससे वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ बढ़ गई हैं, जबकि शांति स्थापित करने के प्रयास भी जारी हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने चल रही शांति वार्ताओं के बावजूद एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वाशिंगटन ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया और तेहरान ने जवाब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू करेगा। इस बीच, अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।
अमेरिकी हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इस कार्रवाई के बाद तेहरान ने और अधिक सख्त जवाब देने की धमकी दी, जिससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच संघर्ष के और गहराने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चल रहे संघर्ष के चौथे महीने में लड़ाई, कूटनीतिक गतिरोध और सैन्य तनाव के बीच ईरान अंततः शांति समझौते के लिए बातचीत करने को मजबूर होगा।
अमेरिकी बलों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के चार ड्रोन को इंटरसेप्ट किया और बाद में क़ेश्म द्वीप तथा गोरुक में स्थित रडार ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका का कहना है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।