बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को 80 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इसकी पुष्टि की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके डॉक्टरों ने बताया कि वह लीवर के उन्नत सिरोसिस से पीड़ित थीं। इसके अलावा उन्हें गठिया, मधुमेह तथा गंभीर छाती और हृदय संबंधी समस्याएं भी थीं।
बीएनपी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, “खालिदा जिया का सुबह करीब 6:00 बजे, फजर की नमाज़ के तुरंत बाद निधन हो गया।” पोस्ट में आगे कहा गया, “हम उनकी आत्मा की मग़फिरत के लिए दुआ करते हैं और सभी से निवेदन करते हैं कि वे उनकी दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करें।”
ढाका में होने की संभावना अंतिम संस्कार की
उनका अंतिम संस्कार बुधवार को ढाका के मणिक मिया एवेन्यू पर होने की संभावना है। बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने प्रथोम आलो के हवाले से यह जानकारी साझा की।
अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पार्टी नेताओं और समर्थकों के बड़ी संख्या में एकत्र होने की उम्मीद है।
बीमारी और कानूनी मामलों से लंबा संघर्ष
खालिदा जिया कई वर्षों से अस्वस्थ थीं और लंबे समय तक चिकित्सकीय देखरेख में रहीं।
इसी दौरान उन्हें कई कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 में एक अदालत ने उन्हें 2008 के एक भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया था, जो अनाथों के लिए निर्धारित धन के दुरुपयोग से जुड़ा था।
बाद में राजनीतिक बदलावों के चलते उन्हें नजरबंदी से रिहा किया गया। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार ने स्वास्थ्य आधार पर 2020 में उनकी सजा निलंबित कर दी थी। हालांकि, इस आदेश के तहत उन्हें विदेश यात्रा करने या राजनीति में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया था।
इस वर्ष जनवरी में बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी पूर्व सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया और 10 साल की जेल की सजा को निरस्त कर दिया।
बीएनपी लगातार यह दावा करती रही कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे। पार्टी का आरोप था कि शेख हसीना सरकार ने राजनीतिक कारणों से खालिदा जिया को निशाना बनाया।
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
खालिदा जिया ने दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया—पहली बार 1991 से 1996 तक और दूसरी बार 2001 से 2006 तक।
वह देश की सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली महिला थीं। उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के पूर्व सेना प्रमुख और राष्ट्रपति थे।
खालिदा जिया 1991 के आम चुनाव में जनमत के जरिए सत्ता में आई थीं। उनके शासनकाल में संसदीय शासन प्रणाली को बहाल किया गया। इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाहक सरकार प्रणाली की शुरुआत की, जैसा कि द डेली स्टार ने रिपोर्ट किया।
गिरफ्तारी, राजनीति में वापसी और अंतिम वर्ष
2007 में सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार ने बांग्लादेश की सत्ता संभाली। इस दौरान खालिदा जिया को शेख हसीना सहित कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ जेल में डाल दिया गया था।
बाद में उन्हें रिहा किया गया और उन्होंने 2008 के संसदीय चुनाव लड़े, लेकिन उनकी पार्टी को सफलता नहीं मिली।
खालिदा जिया के परिवार में उनके बड़े बेटे तारिक रहमान, उनकी पत्नी और उनकी बेटी हैं। तारिक रहमान 17 वर्षों के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे थे।
