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शिवसेना (UBT) का फिर से विभाजन की अटकलों से सामना, रिपोर्टों में विधायकों और सांसदों के दलबदल की संभावना
शिवसेना (UBT) के भीतर एक बार फिर टूट की नई अटकलें सामने आई हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कई विधायक और सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ सकते हैं, जबकि कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

शिवसेना (UBT) एक बार फिर संभावित टूट की अटकलों का सामना कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कई विधायक और सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब 14 से 16 विधायक और छह सांसद आने वाले दिनों में पार्टी से अलग होने पर विचार कर रहे हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह घटनाक्रम अगले एक सप्ताह के भीतर सामने आ सकता है और यह पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका होगा। यह स्थिति लगभग चार साल पहले 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह की याद दिलाती है, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को बदल दिया था और मूल शिवसेना का विभाजन कर दिया था।

शिवसेना (UBT) पर बढ़ा ध्यान

इस कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर चर्चा तेज होने के बाद राजनीतिक ध्यान अब शिवसेना (UBT) पर केंद्रित हो गया है। आरोप हैं कि ठाकरे खेमे के नेताओं को तोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिश की जा रही है।

इन अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने निवास ‘मातोश्री’ पर शिवसेना (UBT) के सभी नौ लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य पार्टी की एकता की समीक्षा करना और विद्रोह की अफवाहों पर चर्चा करना था। हालांकि, यह बैठक भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

पार्टी के भीतर कथित असंतोष

शिंदे गुट के सांसद प्रतापराव जाधव ने हाल ही में शिवसेना (UBT) सांसद संजय देशमुख से मुलाकात की। इस पर उन्होंने कहा कि पुराने सहयोगियों के बीच मुलाकात सामान्य बात है, लेकिन कई लोग ठाकरे परिवार और संजय राउत से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सांसद और विधायक संपर्क में हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे पार्टी छोड़ देंगे। हालांकि, उनके बयान ने असंतोष की चर्चाओं को और बढ़ा दिया।

शिवसेना (UBT) ने किया खंडन

शिवसेना (UBT) नेताओं ने विभाजन की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत ने सवाल उठाया कि जिन सांसदों के नाम लिए जा रहे हैं, उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा।

उन्होंने दावा किया कि सभी सांसद बैठक में शामिल हुए और जो उपस्थित नहीं हो सके, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे। पार्टी का कहना है कि उनके सभी सांसद एकजुट हैं।

‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है?

“ऑपरेशन टाइगर” शब्द महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के दिनों में चर्चा में है। यह कथित रूप से एक अभियान को दर्शाता है, जिसमें शिंदे गुट द्वारा ठाकरे खेमे के विधायकों और सांसदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि संभावित राजनीतिक फेरबदल को लेकर दिल्ली में भी चर्चा हुई है।

शिंदे गुट ने किया इनकार

शिंदे गुट के नेताओं ने किसी भी तरह की तोड़फोड़ की कोशिश से इनकार किया है। उनका कहना है कि “ऑपरेशन टाइगर” केवल अफवाह है।

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा कि पार्टी का ध्यान शासन और विकास पर है, न कि किसी अन्य दल को तोड़ने पर। उन्होंने कहा कि पार्टी में रोज़ लोग शामिल हो रहे हैं, इसलिए इसे “ऑपरेशन प्रोग्रेस” कहा जाना चाहिए, न कि कोई विभाजन अभियान।

आगे क्या होगा?

फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलें तेज हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक टूट या दलबदल नहीं हुआ है। दोनों गुट अपने-अपने दावों पर कायम हैं। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि यह केवल राजनीतिक चर्चा है या वास्तव में बड़ा बदलाव होने वाला है।