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2023 के बाद अमेरिका में महंगाई उच्चतम स्तर पर, ट्रंप बोले- ‘मुझे महंगाई पसंद है’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में महंगाई के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं को खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें "महंगाई पसंद है"।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिज कर दिया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई जब नए आर्थिक आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में महंगाई दर तीन वर्षों से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें महंगाई के ताजा आंकड़ों को लेकर कोई चिंता नहीं है। इसके बजाय उन्होंने एक अप्रत्याशित टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें "महंगाई पसंद है"। उनका तर्क था कि मौजूदा मूल्य वृद्धि तेल बाजार में हो रहे घटनाक्रमों से जुड़ी है, जो अंततः अमेरिका के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

महंगाई बढ़ने का ट्रंप ने किया बचाव

मई महीने में महंगाई बढ़ने के ताजा आंकड़े आने के बाद पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या उन्हें बढ़ती कीमतों की चिंता है। इस पर उन्होंने जवाब दिया, "नहीं, मुझे यह पसंद है। मुझे महंगाई पसंद है।"

ट्रंप ने दावा किया कि महंगाई में बढ़ोतरी ऊर्जा बाजार और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के कारण हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चुपचाप ईरान से जुड़े लाखों बैरल तेल को बाजार से हटा रहा है, हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत या विस्तृत जानकारी नहीं दी।

ट्रंप ने कहा,

"आप जानते हैं क्यों? क्योंकि जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा... क्या आपको पता है कि हम लाखों बैरल तेल हटा रहे हैं? किसी को इसके बारे में पता नहीं है। और आपको पता है किसे नहीं पता? ईरान को भी, कम से कम अभी तक।"

2023 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची महंगाई

अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मई में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 4.2 प्रतिशत बढ़ा। यह लगातार तीसरा मासिक उछाल है और अप्रैल 2023 के बाद महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर भी है।

अप्रैल में महंगाई दर 3.8 प्रतिशत थी, जो मई में बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। इस वृद्धि में ऊर्जा लागत की बड़ी भूमिका रही। विशेष रूप से पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने देशभर में उपभोक्ता खर्च को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वहीं, खाद्य और ऊर्जा कीमतों को छोड़कर गणना की जाने वाली कोर महंगाई दर 2.9 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत स्थिर रही।

ऊर्जा कीमतों में उछाल से बढ़ा महंगाई का दबाव

महंगाई में यह ताजा उछाल ऐसे समय आया है जब ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक तेल बाजार दबाव में हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ईंधन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे परिवहन खर्च और घरेलू खर्च दोनों में वृद्धि हुई है।

हाल के महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इसके बावजूद ट्रंप का कहना है कि संघर्ष समाप्त होने और ऊर्जा बाजार सामान्य होने के बाद महंगाई में कमी आ जाएगी।

फेडरल रिजर्व के सामने बढ़ी चुनौती

महंगाई के नए आंकड़ों ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के लिए नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। व्हाइट हाउस लगातार फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव बना रहा है। हालांकि, महंगाई में ताजा बढ़ोतरी नीति निर्माताओं को अधिक सतर्क बना सकती है।

फेडरल रिजर्व के अधिकारियों को उम्मीद थी कि महंगाई धीरे-धीरे उसके 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। लेकिन नए आंकड़ों से संकेत मिलता है कि मूल्य दबाव अनुमान से कहीं अधिक मजबूत बना हुआ है।

इसी कारण कई अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि फेड ब्याज दरों में संभावित कटौती को टाल सकता है। वे इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी फैलती है और व्यापक महंगाई दबाव पैदा करती है।

निवेशकों ने बदली अपनी उम्मीदें

वित्तीय बाजारों ने भी अपनी अपेक्षाओं में बदलाव करना शुरू कर दिया है। कई निवेशकों का अब मानना है कि फेडरल रिजर्व उधारी की लागत को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है, बजाय इसके कि वह जल्द ही ब्याज दरों में कटौती करे।

महंगाई की ताजा रिपोर्ट ने निकट भविष्य में आक्रामक मौद्रिक राहत की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। इस बीच व्यवसाय और उपभोक्ता आर्थिक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

महंगाई से बढ़ा राजनीतिक दबाव

महंगाई में दोबारा आई तेजी आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकती है। ट्रंप ने सत्ता में लौटते समय कीमतें कम करने और अमेरिकी परिवारों की क्रय-क्षमता बढ़ाने का वादा किया था।

हालांकि अब महंगाई दर 4 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है और ईंधन की बढ़ती कीमतें घरेलू बजट पर असर डाल रही हैं। जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि मजबूत रोजगार बाजार के बावजूद कई अमेरिकी नागरिक जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित हैं।

आलोचकों का कहना है कि ईरान से जुड़े तनावों के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतें ऐसे समय में उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को कम कर रही हैं जब आवास, भोजन और परिवहन पहले से ही महंगे बने हुए हैं।

हालांकि ट्रंप प्रशासन के समर्थकों का तर्क है कि महंगाई में मौजूदा उछाल अस्थायी है और यह गहरे आर्थिक संकट के बजाय मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाओं का परिणाम है।

फिलहाल ट्रंप की टिप्पणियां उपभोक्ताओं, निवेशकों और फेडरल रिजर्व अधिकारियों की चिंताओं से बिल्कुल अलग दिखाई देती हैं। ये सभी इस बात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी अस्थायी साबित होती है या फिर यह लंबे समय तक रहने वाली महंगाई की समस्या का संकेत है।