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ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तेल व्यापार से जुड़ी कंपनियों को चेतावनी दी
ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईरान के तेल व्यापार से जुड़ी किसी भी संस्था या कंपनी को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान युद्धविराम को बढ़ाने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी रखे हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईरान के तेल व्यापार या ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े किसी भी व्यक्ति या कंपनी को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाने और ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से वार्ता को पुनर्जीवित करने के लिए बातचीत जारी रखे हुए हैं।

ट्रंप प्रशासन ने एक बयान में कहा, “ईरान के अवैध तेल व्यापार में सहयोग करने या ईरानी ऊर्जा उत्पादों का व्यापार करने वाली किसी भी इकाई पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने का जोखिम है।”

बयान में आगे कहा गया, “अमेरिका कहीं भी और किसी के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा, जो ईरानी सरकार को अपने पड़ोसियों और अपने ही लोगों पर हमला करने की क्षमता के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।”

युद्धविराम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी

अमेरिका और ईरान वर्तमान में एक समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों पक्ष समझौते की मूल रूपरेखा पर सहमत हो चुके हैं, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इसे आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है। वहीं ईरान का कहना है कि समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।

ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि बातचीत पूरी होने के बाद तेहरान समझौते का विवरण सार्वजनिक करेगा।

ईरान के तेल नेटवर्क पर अमेरिका का निशाना

ट्रंप प्रशासन ने कहा कि उसने ईरान की तेल आय को रोकने के लिए “समन्वित कार्रवाई” शुरू कर दी है। बयान में कहा गया, “अमेरिका ईरानी शासन की उन आय धाराओं को समाप्त करने के लिए समन्वित कार्रवाई कर रहा है जो उसकी क्षेत्रीय आक्रामकता और वैश्विक आतंकवाद को वित्तपोषित करती हैं।”

अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार से जुड़े कई व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। बयान में कहा गया, “विदेश विभाग उन अनेक संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगा रहा है जो ईरान की अवैध तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सीधे तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) तथा ईरानी सैन्य ढांचे की वित्तीय जीवनरेखाओं को निशाना बनाते हैं।”

अमेरिका के अनुसार, ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के परिवहन में शामिल आठ संस्थाओं और आठ जहाजों को काली सूची में डाला गया है। सरकार ने ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री से जुड़े तीन कंपनियों और एक व्यक्ति पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।

हांगकांग स्थित तेल व्यापार नेटवर्क पर भी कार्रवाई

अमेरिकी वित्त विभाग ने हांगकांग स्थित कंपनियों के माध्यम से संचालित एक बड़े तेल व्यापार नेटवर्क पर भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। बयान में कहा गया, “वित्त विभाग उस तेल बिक्री नेटवर्क के प्रमुख संचालकों पर प्रतिबंध लगा रहा है जिसने अरबों डॉलर मूल्य के करोड़ों बैरल ईरानी तेल का व्यापार किया है।”

अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह नेटवर्क ईरानी तेल के भंडारण, परिवहन और बिक्री में मदद करता था तथा इससे प्राप्त धनराशि आईआरजीसी और अन्य सैन्य-संबद्ध संगठनों तक पहुंचती थी।

ईरान पर अमेरिका के नए हमले

ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं जब कुछ दिन पहले अमेरिका ने ईरान के भीतर नए सैन्य हमले किए थे।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी बलों ने “आत्मरक्षा” के तहत ईरानी मिसाइल ठिकानों और उन नौकाओं को निशाना बनाया जो कथित तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं।

बताया गया कि हमले ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के आसपास के क्षेत्रों में किए गए। ईरान ने इन हमलों की निंदा करते हुए अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया।

बाद में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया तथा ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले एक अमेरिकी लड़ाकू विमान और दूसरे ड्रोन पर भी गोलीबारी की।

आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन का जवाब देने का ईरान को “वैध और निश्चित” अधिकार है।

क्षेत्रीय तनाव अब भी बरकरार

अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई थी।

इसके बाद ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। तेहरान ने कुछ समय के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद भी कर दिया था, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ और तेल की कीमतों में तेज उछाल आया।

हालांकि 8 अप्रैल से युद्धविराम अधिकांशतः लागू है, फिर भी खाड़ी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित एमओयू में युद्धविराम का विस्तार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रखना शामिल है, जो वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब भी सबसे बड़े अनसुलझे मुद्दों में से एक बना हुआ है।