भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के दूतावास ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की हालिया टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और वॉशिंगटन पर पश्चिम एशिया में अमेरिका और “जायोनिस्ट शासन” की कथित अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई, जिसमें रुबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि अमेरिका ईरान को “वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने” की अनुमति नहीं देगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, रुबियो ने क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत के ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के उद्देश्य से भारत को अमेरिकी ऊर्जा निर्यात बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा की।
वैश्विक ऊर्जा व्यवधानों के लिए ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को ठहराया जिम्मेदार
24 मई को जारी विस्तृत बयान में भारत स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि तेहरान हमेशा भारत सहित दुनिया भर के देशों को तेल और ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहा है।
दूतावास ने तर्क दिया कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में वास्तविक व्यवधान ईरानी तेल निर्यात पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण हुआ है। उसने इन प्रतिबंधों को अवैध बताया और कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं।
ईरान ने यह भी दावा किया कि पिछले कई दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों ने केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ईरानी नागरिकों के लिए दवाओं और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को भी प्रभावित किया है।
दूतावास के अनुसार, इन प्रतिबंधों ने मानवीय संकट पैदा किया है और उन मरीजों के जीवन को खतरे में डाला है जिन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता है।
Press Statement by the Embassy of the Islamic Republic of Iran in India in Response to the Remarks of the U.S. Secretary of State
— Iran in India (@Iran_in_India) May 24, 2026
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in India rejects the recent remarks made by the United States Secretary of State regarding the Islamic…
ईरान ने क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए अमेरिका और इज़राइल पर लगाया आरोप
दूतावास ने अमेरिका और इज़राइल पर सैन्य कार्रवाइयों और उकसावे वाली गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास।
तेहरान ने दावा किया कि इन गतिविधियों ने समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाला है और वैश्विक ऊर्जा संकट को और गंभीर बनाया है।
ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का किया बचाव
अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर उठ रही अंतरराष्ट्रीय चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने दोहराया कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और यह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में है।
दूतावास ने कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के सदस्य के रूप में ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करने का वैध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अधिकार है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ताओं का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। यह क्षेत्र में व्यापक युद्धविराम समझौते की कोशिशों में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक भी बन गया है।
ईरान ने कहा, खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार
दूतावास ने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के दबाव तथा सैन्य आक्रामकता का सामना किया है। तेहरान ने दावा किया कि देश की राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयासों के बावजूद वह पहले से अधिक मजबूत होकर उभरा है।
दूतावास ने आगे कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
