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वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और देश की अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के बीच भारतभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

शुक्रवार को पूरे भारत में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, जब तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं और इससे महंगाई, परिवहन लागत तथा घरेलू खर्चों को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

संशोधित दरों के तहत पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 3.14 रुपये तक की वृद्धि हुई, जबकि डीजल के दाम 3.11 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए।

बड़े शहरों में बढ़े ईंधन के दाम

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3 रुपये बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपये महंगा होकर 106.68 रुपये प्रति लीटर हो गया। वहीं डीजल 3.11 रुपये बढ़कर 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गया।

कोलकाता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली। यहां पेट्रोल 3.29 रुपये महंगा होकर 108.74 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल 3.11 रुपये बढ़कर 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गया। चेन्नई में पेट्रोल 2.83 रुपये बढ़कर 103.67 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.86 रुपये बढ़कर 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गया।

देशभर में महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल

नई दरों के बाद भारत में सामान्य पेट्रोल की कीमतें अब राज्य करों और स्थानीय शुल्कों के अनुसार 94.77 रुपये से 97.91 रुपये प्रति लीटर के बीच पहुंच गई हैं। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत कई शहरों में 105.14 रुपये से 107.14 रुपये प्रति लीटर तक हो गई है।

डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। सामान्य डीजल अब विभिन्न राज्यों में 87.67 रुपये से 90.78 रुपये प्रति लीटर के बीच बिक रहा है।

वैश्विक तेल कीमतों का असर

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। इन परिस्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है और तेल कंपनियों की लागत में इजाफा किया है।

तेल विपणन कंपनियों ने कहा कि उनके पास बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक एवं उपभोक्ता है। हाल तक सरकार और तेल कंपनियां वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही थीं ताकि उपभोक्ताओं को अचानक महंगाई से बचाया जा सके।

हालांकि ताजा बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण सरकार और तेल विपणन कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।

घरेलू खर्च और परिवहन पर असर संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी का असर देशभर के घरेलू बजट पर पड़ेगा। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई लागत बढ़ने की संभावना है, क्योंकि परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में मुख्य रूप से डीजल का इस्तेमाल होता है।

कृषि क्षेत्र पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, क्योंकि परिवहन और परिचालन लागत बढ़ेगी। यदि ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक परिवहन किरायों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईंधन बचाने की अपील की

ईंधन कीमतों में यह तेज बढ़ोतरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन की खपत कम करने और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में सहयोग करने को कहा था

रविवार को दिए गए कई संदेशों में मोदी ने लोगों और कंपनियों से वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था फिर शुरू करने और जहां संभव हो ऑनलाइन बैठकों का उपयोग करने की अपील की थी ताकि ईंधन की मांग घटाई जा सके।

प्रधानमंत्री ने कहा था, “वर्तमान परिस्थितियों में हमें विदेशी मुद्रा बचाने पर विशेष जोर देना चाहिए।”

उन्होंने लोगों को मेट्रो रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक इस्तेमाल करने और जहां संभव हो कारपूलिंग अपनाने की भी सलाह दी।

आयात और खपत कम करने की अपील

ईंधन बचत के अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से कम-से-कम एक वर्ष तक अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से सोने जैसे आयातित उत्पादों की खरीद कम करने का भी आग्रह किया, जिनकी शादी के मौसम में अधिक मांग रहती है।

प्रधानमंत्री ने परिवारों से खाद्य तेल की खपत घटाने और किसानों से उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने की भी अपील की। उन्होंने इन कदमों को बढ़ते आयात बिल के दौर में देश के लिए आर्थिक रूप से आवश्यक बताया।

जब प्रधानमंत्री ने यह अपील की थी, तब तक भारत सरकार वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही थी। लेकिन शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी अब भारत की ऊर्जा प्रबंधन रणनीति और तेल विपणन कंपनियों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।