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शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका-चीन संबंधों के लिए ‘नई दृष्टि’ पर ट्रंप सहमत
शी जिनपिंग ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका-चीन संबंधों के लिए एक “नई दृष्टि” पर सहमत हुए हैं, जिसका फोकस सहयोग, स्थिरता और दोनों वैश्विक शक्तियों के बीच टकराव से बचने पर है।

शी जिनपिंग ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के संबंधों के लिए एक “नई दृष्टि” पर सहमति जताई है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, शी ने कहा कि दोनों देशों को “रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता” पर आधारित संबंध विकसित करने चाहिए।

द्विपक्षीय संबंधों के लिए शी ने रखा नया ढांचा

शी जिनपिंग ने कहा कि प्रस्तावित संबंधों का मुख्य आधार सहयोग होना चाहिए, जबकि प्रतिस्पर्धा और मतभेदों को नियंत्रित तरीके से संभाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नया ढांचा दोनों देशों को मतभेदों के बावजूद शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।

शी ने इस दृष्टिकोण को ऐसा मॉडल बताया जिसमें सहयोग केंद्र में रहे, प्रतिस्पर्धा सीमित रहे, मतभेद नियंत्रित रहें और शांति कायम रहे।

चीनी नेता ने ‘विन-विन साझेदारी’ पर दिया जोर

शी जिनपिंग ने अमेरिका-चीन संबंधों के भविष्य को पारस्परिक लाभ वाली साझेदारी के रूप में पेश किया। उन्होंने दोनों देशों से सीधे टकराव से बचने और वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करने की अपील की।

शी ने चेतावनी दी कि बढ़ते तनाव दोनों देशों को संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं।

उन्होंने कहा, “क्या चीन और अमेरिका ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ से बचकर महाशक्तियों के संबंधों का नया मॉडल बना सकते हैं? क्या हम वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर दुनिया को अधिक स्थिरता दे सकते हैं? क्या हम दोनों देशों के लोगों और मानवता के भविष्य के हित में अपने द्विपक्षीय संबंधों के लिए उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं? ये सवाल इतिहास, दुनिया और लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”

क्या है ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’?

“थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” एक ऐतिहासिक सिद्धांत है, जिसके अनुसार जब कोई उभरती शक्ति मौजूदा वैश्विक शक्ति को चुनौती देती है, तब अक्सर संघर्ष की स्थिति पैदा होती है।

इस संदर्भ में चीन को उभरती शक्ति और अमेरिका को स्थापित वैश्विक शक्ति माना जाता है। वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चाओं में इस अवधारणा का अक्सर उल्लेख किया जाता है।

ताइवान मुद्दे पर पहले दी थी चेतावनी

शिखर सम्मेलन में बाद में दिए गए शी के नरम बयान उनकी पहले की चेतावनी से बिल्कुल अलग थे। बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने कथित तौर पर ट्रंप को चेतावनी दी थी कि ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभालने पर चीन और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ सकता है।

ताइवान, अमेरिका-चीन संबंधों के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बना हुआ है।

विश्लेषकों को चीन से दबाव की उम्मीद थी

शिखर सम्मेलन से पहले विश्लेषकों का मानना था कि शी जिनपिंग ताइवान, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर चीन के पक्ष में समर्थन हासिल करने के लिए प्रोत्साहन और दबाव — दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, चीन का मानना था कि बीजिंग के साथ व्यापार युद्ध हारने के बाद ट्रंप की सौदेबाजी की क्षमता सीमित हो गई है।

विश्लेषकों ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ट्रंप को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए आर्थिक रियायतें दे सकते हैं। इनमें अमेरिकी वस्तुओं की चीनी खरीद बढ़ाना और अमेरिका में नए निवेश करना शामिल हो सकता है, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एक सम्मानजनक समझौता तैयार किया जा सके।