अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चीन के बीजिंग का दौरा किया, जबकि वह अब भी चीन के प्रतिबंधों के तहत आते हैं। यह दौरा अमेरिका–चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है। चीन ने कथित तौर पर एक असामान्य कूटनीतिक तरीका अपनाया, जिससे रुबियो पर लगे प्रतिबंधों को आधिकारिक रूप से हटाए बिना ही उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति मिल गई।
चीन ने यात्रा से पहले आधिकारिक दस्तावेजों में रुबियो के उपनाम के चीनी लिप्यंतरण (ट्रांसलिटरेशन) में चुपचाप बदलाव कर दिया। बताया गया कि इस कदम से बीजिंग को पहले से लगे प्रवेश प्रतिबंधों को तकनीकी रूप से दरकिनार करने में मदद मिली।
चीन ने बनाया कूटनीतिक “लूपहोल”
चीन ने 2020 में रुबियो पर दो बार प्रतिबंध लगाए थे, जब वह अमेरिकी सीनेटर थे। बीजिंग ने यह कार्रवाई हांगकांग और शिनजियांग में चीन की नीतियों की उनकी कड़ी आलोचना के कारण की थी। इन प्रतिबंधों में कथित तौर पर प्रवेश प्रतिबंध भी शामिल था।
हालांकि, जनवरी 2025 में रुबियो के विदेश मंत्री बनने से कुछ समय पहले ही, चीनी राज्य एजेंसियों और आधिकारिक मीडिया ने उनके उपनाम के “लू” (Lu) हिस्से के लिए एक अलग चीनी अक्षर का उपयोग शुरू कर दिया।
इस बदलाव ने कथित तौर पर एक तकनीकी खामी पैदा कर दी, जिससे बीजिंग को प्रतिबंध औपचारिक रूप से हटाए बिना ही रुबियो को चीन आने देने का रास्ता मिल गया। चीनी अधिकारियों ने पहले यह भी कहा था कि प्रतिबंध उनके सीनेटर रहते हुए किए गए कार्यों पर लागू थे, न कि उनकी वर्तमान कूटनीतिक भूमिका पर। इसके बाद रुबियो राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एयर फ़ोर्स वन से बीजिंग पहुंचे।
रुबियो की पोशाक पर सोशल मीडिया चर्चा
उड़ान के दौरान व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने एयर फ़ोर्स वन में आराम करते हुए रुबियो की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे ग्रे नाइकी टेक ट्रैकसूट पहने दिखे।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ध्यान दिया कि यह पहनावा पूर्व वेनेज़ुएला राष्ट्रपति निकोला मादुरो द्वारा कथित गिरफ्तारी के दौरान पहने गए कपड़ों से मिलता-जुलता था। व्हाइट हाउस ने बाद में इस तस्वीर को “फुल सर्कल मोमेंट” (पूर्ण चक्र क्षण) लिखकर साझा किया।
Secretary Rubio rocking the Nike Tech ‘Venezuela’ on Air Force One! 😂 pic.twitter.com/yi1b1mR8M0
— Steven Cheung (@StevenCheung47) May 12, 2026
समर्थकों ने इस पोस्ट की सराहना की और इसे ट्रंप प्रशासन की लैटिन अमेरिका नीति से जोड़ा, जबकि आलोचकों ने इसे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता से पहले एक असामान्य संकेत बताया।
व्यापार वार्ता बीजिंग एजेंडा में प्रमुख
ट्रंप और रुबियो की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बड़ी बैठक होने की उम्मीद है। इस यात्रा में व्यापार वार्ता मुख्य एजेंडा रहेगा, क्योंकि दोनों देश टैरिफ विवादों के बाद तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिनमें शुल्क 140 प्रतिशत तक पहुँच गए थे।
दोनों पक्ष एक नए “बोर्ड ऑफ ट्रेड” के गठन पर भी चर्चा कर रहे हैं, जो विवादों को सुलझाने और टैरिफ संघर्ष को कम करने में मदद करेगा। ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख अमेरिकी कारोबारी जैसे एलन मस्क और टिम कुक भी शामिल हैं।
अमेरिका चाहता है कि चीन सोयाबीन, बोइंग विमान और तकनीकी उत्पादों की बड़ी खरीद करे।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ताइवान पर चर्चा
वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव पर भी चर्चा होगी। वॉशिंगटन चाहता है कि बीजिंग ईरानी तेल के आयात को कम करे और खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग मार्ग सुरक्षित रखने में सहयोग दे।
इसके अलावा अमेरिका, चीन और रूस के बीच संभावित त्रिपक्षीय परमाणु समझौते पर भी चर्चा की संभावना है। एक और बड़ा मुद्दा ताइवान को लेकर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज का है, जिसने दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ाया है।
