ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक “नया समीकरण” उभर रहा है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में संभावित बदलाव का संकेत देता है।
एक्स पर पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कहा कि ईरान अच्छी तरह समझता है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की मौजूदा स्थिति अमेरिका के लिए “असहनीय” है।
उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य का नया समीकरण अब मजबूत होता जा रहा है। युद्धविराम का उल्लंघन और नाकेबंदी थोपकर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है; हालांकि उनकी बुरी मंशा कमजोर पड़ेगी।”
उन्होंने आगे कहा, “हम अच्छी तरह जानते हैं कि मौजूदा स्थिति का जारी रहना अमेरिका के लिए असहनीय है, जबकि हमने अभी शुरुआत भी नहीं की है।”
जहाजों को सुरक्षा देने की अमेरिकी योजना
गालिबाफ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र से तटस्थ देशों के जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना की घोषणा की।
सोमवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसके अपाचे और सीहॉक हेलीकॉप्टरों ने ईरानी नौकाओं पर हमले किए। अमेरिका ने आरोप लगाया कि ये नौकाएं वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। सेना ने यह भी कहा कि उसने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को भी रोका।
ईरान ने अपने लड़ाकू जहाजों को निशाना बनाए जाने के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन अमेरिका पर हमला करते समय नौकाओं में सवार पांच नागरिकों की मौत का आरोप लगाया।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं और बढ़ता तनाव
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने अपने क्षेत्र पर ईरान के नए हमलों की जानकारी दी। अधिकारियों ने फुजैराह स्थित एक ऊर्जा सुविधा पर मिसाइल और ड्रोन हमलों को “खतरनाक तनाव वृद्धि और अस्वीकार्य अतिक्रमण” बताया।
वहीं सऊदी अरब ने तनाव कम करने के लिए नए कूटनीतिक प्रयासों की अपील की और सभी पक्षों से “राजनीतिक समाधान तक पहुंचने” का आग्रह किया।
नाकेबंदी और जवाबी नाकेबंदी
मौजूदा संकट तब शुरू हुआ जब युद्ध छिड़ने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर नाकेबंदी लगा दी। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी।
इसके जवाब में ट्रंप ने 13 अप्रैल को जवाबी नाकेबंदी की घोषणा की, जिसमें ईरानी बंदरगाहों का इस्तेमाल करने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। इस कदम से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक पर नियंत्रण को लेकर तनाव काफी बढ़ गया।
‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ से बढ़ा दांव
ताजा घटनाक्रम का केंद्र “प्रोजेक्ट फ्रीडम” है। यह अमेरिकी अभियान क्षेत्र में फंसे मालवाहक जहाजों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करना है। हालांकि इस योजना में बड़े जोखिम भी जुड़े हैं।
ईरान की सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि वह क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज को निशाना बनाएगी। इससे आशंका बढ़ गई है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा की कोशिशें बड़े संघर्ष और क्षेत्र में फिर से हिंसा को जन्म दे सकती हैं।
आगे का रास्ता अनिश्चित
दोनों पक्षों के सख्त रुख अपनाने के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान द्वारा “नए समीकरण” का जिक्र सख्त नीति की ओर संकेत करता है, जबकि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई लगातार दबाव बनाए रखने का संकेत दे रही है।
तनाव बढ़ने के साथ आगे और टकराव की आशंका भी गहराती जा रही है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों दांव पर लगी हुई हैं।
