अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात घोषणा की कि वह “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को कुछ समय के लिए रोक रहे हैं। यह मिशन होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा देकर सुरक्षित रास्ता देने के लिए शुरू किया गया था। यह रोक अभियान शुरू होने के सिर्फ 24 घंटे बाद लगाई गई।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध के बाद लिया गया, जो इस समय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने ईरान के साथ बातचीत में “बड़ी प्रगति” होने का भी जिक्र किया।
ट्रंप ने लिखा, “पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध के आधार पर… और इस तथ्य को देखते हुए कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ पूर्ण और अंतिम समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है, हमने आपसी सहमति से प्रोजेक्ट फ्रीडम को थोड़े समय के लिए रोकने का फैसला किया है।”
तनाव बढ़ा, फिर विराम
सोमवार को संघर्ष तेज हो गया था। अमेरिकी नौसेना बलों की ईरानी नौकाओं के साथ मुठभेड़ हुई। अमेरिका ने ड्रोन और मिसाइलों को भी रोकने का दावा किया। शुरुआत में अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम को “मानवीय अभियान” बताया था, लेकिन इसके बड़े सैन्य अभियान में बदलने का खतरा बढ़ गया था।
ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी और वह “पूरी तरह प्रभावी” बनी हुई है।
कूटनीतिक बातचीत से हालात कुछ शांत हुए। संयुक्त अरब अमीरात में तेल सुविधाओं पर ईरानी हमलों के बाद पाकिस्तान ने मध्यस्थता शुरू की थी। इन प्रयासों से 8 अप्रैल के नाजुक युद्धविराम को बनाए रखने में मदद मिली।
अब भी फंसे हैं जहाज
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। 800 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं और लगभग 20,000 चालक दल के सदस्य इंतजार कर रहे हैं। सोमवार को केवल कुछ ही जहाज वहां से गुजर सके, जबकि अधिकांश समुद्री व्यापार अब भी ठप पड़ा है।
वॉशिंगटन में इस विराम से राजनीतिक दबाव कुछ कम हो सकता है। डेमोक्रेट नेताओं ने इस अभियान को लेकर चिंता जताई थी और “वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन” के तहत इसकी वैधता पर सवाल उठाए थे।
अमेरिका ने किया बचाव
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मिशन का बचाव किया। उन्होंने इसे खाड़ी क्षेत्र के ऊपर “सुरक्षात्मक ढाल” बताया। दोनों नेताओं ने इसे समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए “रेड, व्हाइट एंड ब्लू डोम” कहा।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में “स्थिरता बनाए रखने” में सक्षम है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी कि किसी भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।व्हाइट हाउस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह विराम कितने समय तक रहेगा। आगे की रणनीति को लेकर स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।
