शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण सत्र देखने को मिला। दिन भर जोरदार विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक टकराव और अंत में मुख्यमंत्री भगवंत मान तथा उनकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के समर्थन में विश्वास प्रस्ताव पारित हुआ।
ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं, जब राज्य में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने की संभावना है।
राजनीतिक बदलावों के बीच विश्वास प्रस्ताव
मान सरकार ने कई राजनीतिक झटकों के बाद विश्वास प्रस्ताव पेश किया। पंजाब से छह राज्यसभा सांसद, राघव चड्ढा के नेतृत्व में, हाल ही में AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। एक अन्य सांसद स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी छोड़ दी।
विश्वास मत जीतने के बाद मान ने कहा कि यह प्रस्ताव जनता में फैली भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा, “कुछ अफवाहों ने आम जनता में भ्रम पैदा कर दिया था। इस विश्वास प्रस्ताव को उस भ्रम को दूर करने के लिए लाया गया है।”
उन्होंने दलबदल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब झाड़ू से गंदगी साफ की जाती है, तो कुछ तिनके निकल जाते हैं, लेकिन इससे झाड़ू पर कोई असर नहीं पड़ता।”
विपक्ष ने किया बहिष्कार
कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) सहित विपक्षी दलों ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मान “नशे की हालत” में सत्र में शामिल हुए थे। हालांकि, सरकार ने उनकी अनुपस्थिति में ही प्रस्ताव पारित कर दिया।
मान ने बाद में कहा कि वह 5 मई को राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान इस प्रस्ताव की प्रति साथ लेकर जाएंगे।
मान का विपक्ष पर हमला
सत्र के बाद मान ने मतदान में हिस्सा न लेने के लिए विपक्ष की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से अफवाहें थीं कि सरकार के 52 विधायक यहां हैं, 51 वहां हैं। कांग्रेस ने ‘इधर-उधर’ का यह माहौल बनाया, लेकिन वे विश्वास प्रस्ताव के मतदान के दौरान मौजूद नहीं थे। कम से कम उन्हें रुककर इसका विरोध करना चाहिए था। उनका मौजूद न होना भी आम आदमी पार्टी के समर्थन जैसा है।”
शराब टेस्ट की मांग पर हंगामा
विश्वास प्रस्ताव पारित होने से पहले विधानसभा में हंगामे की स्थिति बन गई। सत्तारूढ़ AAP और विपक्षी कांग्रेस के सदस्य मुख्यमंत्री के लिए अल्कोहल टेस्ट की मांग को लेकर भिड़ गए।
कांग्रेस विधायकों ने ब्रीथ एनालाइज़र टेस्ट की मांग की, जबकि AAP सदस्यों ने नारेबाजी कर इसका विरोध किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोपहर के बाद कार्यवाही शुरू होते ही सदन को स्थगित करना पड़ा। स्पीकर ने मुख्यमंत्री और अन्य विधायकों के तत्काल डोप टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया।
इससे पहले विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मान के “व्यवहार” को लेकर चिंता जताई थी और इस संबंध में स्पीकर को पत्र लिखा था।
भाजपा ने भी किया समर्थन
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अल्कोहल टेस्ट की मांग का समर्थन किया।
पंजाब भाजपा प्रमुख सुनील जाखड़ ने कहा, “अगर सरकार नशे की हालत में विधानसभा आती है, तो यह न केवल बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान है, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर का भी अपमान है।”
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब विधानसभा को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है। अगर कोई मंदिर या गुरुद्वारे में नशे की हालत में प्रवेश करता है, तो यह अवमानना और अपमान है। चाहे मुख्यमंत्री भगवंत मान आज फ्लोर टेस्ट कराएं या नहीं... मेरी एक ही अपील है कि आज के विशेष सत्र के महत्व को देखते हुए सभी नेताओं का ब्रीथ एनालाइज़र टेस्ट होना चाहिए। अगर सभी नेताओं का टेस्ट हो जाए, तो फ्लोर टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
आप ने आरोपों को नकारा
सत्तारूढ़ AAP ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
पंजाब AAP प्रमुख और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा, “कांग्रेस बेबुनियाद और तुच्छ टिप्पणियां कर रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है और कार्यकर्ताओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है तथा सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।”
चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव
कुल मिलाकर, विधानसभा में हुई घटनाओं ने आगामी चुनावों से पहले पंजाब में बढ़ते राजनीतिक तनाव को उजागर किया। जहां AAP सरकार ने विश्वास मत हासिल कर लिया, वहीं तीखी बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन ने सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच गहरे मतभेदों को साफ दिखा दिया।
