भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका ईरान के साथ ऐसा कोई सामान्य समझौता नहीं है, जिसके तहत सभी भारतीय-ध्वज वाले जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से स्वतंत्र रूप से गुजर सकें। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि हाल ही में कुछ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग से गुजर पाए हैं, लेकिन यह तेहरान के साथ किसी व्यापक समझौते का परिणाम नहीं है। इसके बजाय, हर जहाज की आवाजाही को कूटनीतिक समन्वय के जरिए अलग-अलग आधार पर संभाला गया है।
जयशंकर ने विशेष समझौते के दावों को खारिज किया
फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में जयशंकर ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि भारत ने ईरान के साथ अपने जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए कोई सामान्य समझौता किया है। उन्होंने कहा, “हर जहाज की आवाजाही एक अलग मामला है।”
उनकी यह टिप्पणी उस बयान के बाद आई, जिसमें क्रिस राइट ने कहा था कि भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य से गुजर पाए क्योंकि “शायद ईरान ने भारत के साथ कोई समझौता किया है।”
जयशंकर ने इस दावे को नकारते हुए साफ किया कि ऐसा कोई समझौता नहीं है। उन्होंने यह अटकलें भी खारिज कीं कि भारत ने इस रणनीतिक मार्ग से जहाजों को गुजरने देने के बदले ईरान को कुछ पेशकश की है।
कूटनीति से कुछ जहाजों को मिला सुरक्षित मार्ग
यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जारी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान तनाव का केंद्र बन गया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में टैंकर यातायात प्रभावित हुआ है और बाजारों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ी है।
जयशंकर ने कहा कि ईरान के साथ भारत की कूटनीतिक बातचीत ने ऐसी परिस्थितियां बनाने में मदद की है, जिससे कुछ भारतीय जहाज इस मार्ग से सुरक्षित गुजर सके। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में सामान्य शिपिंग गतिविधियों को बहाल करने के लिए संवाद सबसे व्यावहारिक तरीका है।
भारत सभी पक्षों के साथ बनाए रख रहा संपर्क
जयशंकर के अनुसार, भारत की रणनीति यह है कि वह संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखे और साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे। यह दृष्टिकोण नई दिल्ली को क्षेत्र में तनाव बढ़ाए बिना अपने शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा करने में मदद करता है।
भारत की कूटनीतिक पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्थिर स्थिति के बावजूद व्यावसायिक जहाज इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरते रहें।
ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़
भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इस कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है। इस मार्ग में किसी भी दीर्घकालिक व्यवधान से ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
फिलहाल, भारतीय अधिकारी औपचारिक समझौतों के बजाय सावधानीपूर्ण कूटनीति पर भरोसा कर रहे हैं, ताकि उनके जहाज इस क्षेत्र से गुजरते रहें। अधिकारियों का कहना है कि हर यात्रा को अलग-अलग आधार पर संभालना क्षेत्र की जटिल सुरक्षा स्थिति को दर्शाता है और इससे भारत के व्यापार व ऊर्जा हितों की रक्षा करते हुए तनाव बढ़ने से भी बचा जा सकता है।
भारत कूटनीतिक संवाद जारी रखेगा
क्षेत्रीय संकट अभी जारी रहने के कारण भारत के ईरान और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की संभावना है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से गुजरते रहें।
