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प्रल्हाद जोशी बने शिक्षा मंत्री, परीक्षा सुधारों और एनईपी को दी प्राथमिकता
प्रल्हाद जोशी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उनकी तत्काल प्राथमिकता NEET पेपर लीक विवाद के बाद भारत की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफा दिया था। जोशी उपभोक्ता मामलों के मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी जारी रखेंगे और साथ ही शिक्षा मंत्रालय का भी कार्यभार संभालेंगे।

कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में देशभर में हुए प्रदर्शनों में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी। इसके बाद प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे पत्र में प्रधान ने कहा कि यह मुद्दा “व्यक्तिगत प्रतिष्ठा” का नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से वह बेहद परेशान हैं।

जोशी ने शिक्षा सुधारों को जारी रखने का दिया भरोसा

अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और कहा कि उन्होंने यह जिम्मेदारी कर्तव्य और विनम्रता की भावना से स्वीकार की है। उन्होंने कहा, “मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले 12 वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं। पिछले चार से पांच वर्षों में धर्मेंद्र प्रधान ने भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। देश ने नई शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करूंगा।”

पहली चुनौती: परीक्षाओं में भरोसा बहाल करना

प्रल्हाद जोशी के सामने पहले दिन से ही सबसे बड़ी चुनौती है। उन्हें भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करना होगा। NEET पेपर लीक विवाद ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों के भरोसे को प्रभावित किया है। जोशी को लाखों उम्मीदवारों को भरोसा दिलाना होगा कि भविष्य की परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित होंगी।

उन्हें देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद पैदा हुए जन आक्रोश का भी सामना करना होगा। इसके अलावा, परीक्षा रद्द होने के बाद गंभीर भावनात्मक तनाव से गुजरने वाले छात्रों के परिवारों के लिए राहत उपायों की निगरानी भी करनी होगी।

दूसरी चुनौती: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में सुधार

जोशी के सामने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में बड़े बदलाव करने की भी चुनौती होगी। उन्हें सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी और एजेंसी के कामकाज में सुधार करना होगा। उन्हें उन कमियों को दूर करना होगा जिनके कारण पेपर लीक और परीक्षा में अन्य अनियमितताओं की घटनाएं हुईं।

सरकार से यह भी उम्मीद है कि वह नकल विरोधी कानूनों को और सख्त बनाएगी तथा संगठित पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही जोशी को पेन-पेपर आधारित परीक्षाओं से सुरक्षित कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग (CBT) प्रणाली में बदलाव की प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।

तीसरी चुनौती: राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करना

जोशी को देशभर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाना होगा। उन्हें अलग-अलग शिक्षा प्रणालियों का पालन करने वाले राज्यों के साथ मिलकर काम करना होगा।

उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सुधारों की प्रक्रिया बिना किसी देरी के आगे बढ़े। इसके साथ ही वह उपभोक्ता मामले और स्वच्छ ऊर्जा मंत्रालयों से जुड़ी अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को भी संभालते रहेंगे।

नए शिक्षा मंत्री के लिए चुनौतीपूर्ण शुरुआत

प्रल्हाद जोशी ने ऐसे समय में शिक्षा क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाली है जब भारत की परीक्षा प्रणाली एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। उन्हें परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना होगा, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में सुधार करना होगा, भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को रोकना होगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना होगा।

आने वाले महीनों में उनके फैसले शिक्षा सुधारों के भविष्य और भारत की परीक्षा प्रणाली में जनता के विश्वास को प्रभावित करेंगे।