वेनेजुएला ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से हटने की घोषणा की है। उसने आरोप लगाया है कि न्यायालय अपने कामकाज में भौगोलिक पक्षपात दिखा रहा है। यह घोषणा शुक्रवार को की गई, जबकि ICC पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार के दौरान कथित रूप से हुए मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच जारी रखे हुए है।
वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र को दी जानकारी
विदेश मंत्री फेलिक्स प्लासेंसिया ने कहा कि वेनेजुएला ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र को ICC छोड़ने के अपने फैसले की जानकारी दे दी है। प्लासेंसिया ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह फैसला “दृढ़ और अपरिवर्तनीय” है।
उन्होंने कहा कि जनवरी में अमेरिकी बलों द्वारा मादुरो को हटाए जाने के बाद पद संभालने वाली अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज ने सरकार को ICC से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
सरकार ने ICC पर लगाया पक्षपात का आरोप
प्लासेंसिया ने कहा कि वेनेजुएला का मानना है कि ICC ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों पर अनुचित रूप से ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है।
उन्होंने कहा, “वेनेजुएला मानता है कि न्यायालय की कार्रवाइयां स्पष्ट भौगोलिक पक्षपात को दर्शाती हैं, जिसके कारण उसका काम अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों पर असमान रूप से केंद्रित रहा है।”
सरकार ने आरोप लगाया कि न्यायालय दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय न्याय को समान रूप से लागू करने में विफल रहा है।
ICC ने कहा- अभी आधिकारिक सूचना नहीं मिली
हेग स्थित न्यायालय ने कहा कि उसे अभी तक वेनेजुएला की आधिकारिक वापसी सूचना प्राप्त नहीं हुई है। ICC ने इस फैसले पर खेद जताया।
न्यायालय ने कहा, “हम सबसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए दंडमुक्ति समाप्त करने के सामूहिक प्रयास से अलग होने के किसी भी फैसले पर खेद व्यक्त करते हैं।”
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी देश की वापसी एक साल बाद ही प्रभावी होती है।
वापसी से मौजूदा जांच पर नहीं पड़ेगा असर
ICC ने जोर देकर कहा कि वेनेजुएला को न्यायालय का सदस्य रहते हुए उत्पन्न हुए दायित्वों को पूरा करना जारी रखना होगा। वापसी प्रभावी होने के बाद भी मौजूदा जांच और कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी।
न्यायालय ने कहा, “वापसी करने वाला देश उन दायित्वों से बंधा रहेगा जो उसके सदस्य देश रहने के दौरान उत्पन्न हुए थे।”
ICC ने यह भी कहा, “वापसी से उन आपराधिक जांचों या कार्यवाहियों से जुड़े पहले से मौजूद सहयोग संबंधी दायित्वों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो पहले ही शुरू हो चुकी थीं।”
ICC ने वेनेजुएला की जांच जारी रखी
ICC वेनेजुएला सरकार द्वारा 2014 से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जांच कर रहा है।
यह जांच कराकस और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण बनी हुई है।
वेनेजुएला पहले भी कर चुका है न्यायालय का विरोध
वेनेजुएला ने हाल के महीनों में ICC के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। दिसंबर 2025 में देश की संसद ने रोम संविधि (Rome Statute) को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जो ICC की स्थापना करने वाली संधि है।
यह कदम तब उठाया गया जब न्यायालय ने कराकस में अपना कार्यालय बंद कर दिया और कहा कि वेनेजुएला सरकार के साथ बातचीत से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
बाद में मार्च 2026 में ICC ने वेनेजुएला की उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अमेरिका के प्रतिबंधों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया था।
ICC नेतृत्व संकट का सामना कर रहा है
वेनेजुएला की घोषणा उसी दिन आई, जब ICC सदस्य देशों ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते मुख्य अभियोजक करीम खान को हटाने के लिए मतदान किया। खान ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनकी कानूनी टीम ने कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।
ICC पर वैश्विक राजनीतिक दबाव
करीम खान ने 2024 में उस समय अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया था, जब उन्होंने गाजा संघर्ष के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों को लेकर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग की थी।
2025 में दोबारा सत्ता में लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ICC की कार्रवाइयों के जवाब में न्यायालय और उसके कई न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका और इजराइल दोनों ही ICC के सदस्य नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय दुनिया के सबसे गंभीर अपराधों, जिनमें युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं, के आरोपियों पर मुकदमा चलाता है।
