ओडिशा के पुरी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान ग्रैंड रोड (बड़ा डांडा) पर भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में कम से कम 200 श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई। वार्षिक रथ यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु एकत्र हुए थे।
बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं को और मजबूत कर दिया, जबकि लाखों श्रद्धालु यात्रा में शामिल होते रहे।
भीड़ बढ़ने से सैकड़ों श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना ग्रैंड रोड पर हुई, जहां भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के दर्शन और उन्हें खींचने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटे थे।
स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (एसआरयू) के जवानों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। उन्होंने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत करने वाले करीब 200 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए पुरी मेडिकल अस्पताल पहुंचाया।
News18 के अनुसार, सूत्रों ने एक व्यक्ति की मौत की आशंका जताई है। हालांकि, इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक अधिकारियों ने किसी भी मौत की पुष्टि नहीं की थी। प्रशासन ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इससे पहले भी एक श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ी थी
दिन में इससे पहले भी एक श्रद्धालु भीड़ के बीच बेहोश हो गया था, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन ने पहले से ही पूरे शहर में आपातकालीन चिकित्सा दल तैनात कर रखे थे ताकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी घटना से तुरंत निपटा जा सके।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
ओडिशा सरकार ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। घटना के बाद अधिकारियों ने भीड़ प्रबंधन के प्रयास और तेज कर दिए तथा ग्रैंड रोड पर लोगों की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखी। भीड़ की स्थिति के बावजूद कड़ी सुरक्षा के बीच रथ यात्रा जारी रही।
भक्ति के माहौल में जारी रहा रथ खींचने का सिलसिला
श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयकारों के बीच तीनों रथों को खींचते रहे। सबसे पहले भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ, उसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ आगे बढ़ा।
तीनों रथ लगभग 2.6 किलोमीटर की यात्रा करते हुए 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर से श्री गुंडिचा मंदिर तक जा रहे हैं, जिसे श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का जन्मस्थान मानते हैं।
पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ हुई यात्रा की शुरुआत
रथ यात्रा की शुरुआत पारंपरिक छेरा पहंरा अनुष्ठान के बाद हुई, जिसमें गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने प्रतीकात्मक रूप से रथों की सफाई की। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने भी यात्रा शुरू होने से पहले समारोह में भाग लिया।
बारिश थमने के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने "हरि बोल" के जयकारे लगाए, मंजीरे बजाए और शंख व तुरहियां बजाईं। इससे पहले पुजारियों ने पारंपरिक पाहंडी अनुष्ठान के तहत भगवानों की प्रतिमाओं को रथों तक पहुंचाया।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, सबसे पहले श्री सुदर्शन को रथ पर विराजमान कराया गया, इसके बाद देवी सुभद्रा, भगवान बलभद्र और अंत में भगवान जगन्नाथ विराजमान हुए। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का दिव्य चक्र है और पुरी में भगवान विष्णु की पूजा भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।
बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं का उत्साह
भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
कई श्रद्धालु ग्रैंड रोड पर नाचते-गाते रहे और भीगते हुए भी पूरे उत्साह से रथ यात्रा में शामिल हुए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मंगलवार से पुरी में 233 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने दिनभर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है।
जलभराव रोकने के लिए प्रशासन सतर्क
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रथ यात्रा से पहले तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा तथा सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
जलभराव की आशंका को देखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन, नगर निकाय और अन्य विभागों को हाई अलर्ट पर रहने तथा जमा बारिश का पानी जल्द निकालने के निर्देश दिए। ग्रैंड रोड से पानी की निकासी के लिए विशेष इंतजाम किए गए ताकि रथों की आवाजाही में कोई बाधा न आए।
हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई. बी. खुरानिया ने बताया कि रथ यात्रा के लिए पुरी में लगभग 13,000 पुलिसकर्मियों और 19 आईपीएस अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आरएएफ और राष्ट्रीय सुरक्षा इकाइयों सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 15 कंपनियां प्रमुख स्थानों पर तैनात की गई हैं।
प्रशासन ने ग्रैंड रोड और आसपास के इलाकों की निगरानी के लिए एआई आधारित 473 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, जिन्हें ड्रोन-जैमिंग प्रणाली से जोड़कर दो कमांड एवं कंट्रोल सेंटरों से संचालित किया जा रहा है।
साथ ही भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और ओडिशा पुलिस की समुद्री इकाई द्वारा संयुक्त गश्त भी शुरू की गई है। पूरे रथ यात्रा महोत्सव के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें (क्यूआरटी) भी तैनात रखी गई हैं।
