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अमेरिका ने ईरान पर किए नए हवाई हमले, लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा संघर्ष
संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर एक और दौर के हवाई हमले पूरे किए, जबकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए सैन्य हमले जारी रखे। वहीं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर गहराते संकट ने पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर अपने ताज़ा हवाई हमलों का अभियान पूरा कर लिया है। इन हमलों में देशभर के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़े ठिकानों पर नए हमले किए हैं।

दोनों देशों के बीच संघर्ष अब लगातार पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब भी इस विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सेंटकॉम ने ताज़ा हवाई अभियान समाप्त होने की घोषणा की

सेंटकॉम ने बताया कि उसका नवीनतम शाम का सैन्य अभियान बुधवार रात 9 बजे (ईस्टर्न टाइम) समाप्त हुआ। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस अभियान में ईरान के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कमज़ोर करना था।

अमेरिकी सेना ने यह भी पुष्टि की कि कई स्थानों, जिनमें बंदर अब्बास बंदरगाह भी शामिल है, पर सटीक निशाना साधने वाले हथियारों (प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन) का इस्तेमाल किया गया। इससे पहले दिन में अमेरिकी बलों ने ग्रेटर टुन्ब द्वीप पर भी एक अलग अभियान चलाया। 90 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान तटीय रक्षा ठिकानों और क्रूज़ मिसाइल स्थलों पर हमले किए गए।

सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, "आज सुबह अमेरिकी बलों ने 90 मिनट तक चले अभियान के दौरान ग्रेटर टुन्ब द्वीप पर तटीय रक्षा और क्रूज़ मिसाइल स्थलों पर हमला किया। कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर अमेरिकी सेना ईरान को उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहरा रही है।" सेंटकॉम ने इन हमलों के कुछ वीडियो भी जारी किए हैं।

ईरानी मीडिया का दावा, कई और इलाकों को बनाया गया निशाना

सेंटकॉम ने हमलों के सभी लक्ष्यों की पूरी सूची जारी नहीं की। हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि तेहरान के पूर्व में स्थित सेमनान हवाई अड्डे पर हमला किया गया। इसके अलावा खोंदाब, क़ेश्म द्वीप और होर्मोज़गान प्रांत के सीरिक क्षेत्र को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई।

अमेरिका का सैन्य अभियान पांचवें दिन भी जारी

बुधवार को ईरान पर अमेरिकी हमलों का लगातार पांचवां दिन था। ताज़ा हमले उस अस्थायी युद्धविराम के टूटने के बाद हुए, जिसने कुछ सप्ताह तक दोनों देशों के बीच तनाव कम रखा था। युद्धविराम समाप्त होने के बाद से दोनों देश पश्चिम एशिया में लगातार एक-दूसरे पर सैन्य हमले कर रहे हैं।

इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में नए हमले किए

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गुरुवार तक नए हमले जारी रखे। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, उसकी सेना ने जॉर्डन स्थित अल-अज़रक एयर बेस पर हमला किया। दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रडार सिस्टम, संचार उपकरण और ईंधन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ईरान ने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर भी हमला किया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस हमले में कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली से जुड़े प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) रडार को नष्ट कर दिया गया। वहीं, कुवैत और जॉर्डन दोनों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हमले होने की पुष्टि की है।

पश्चिम एशिया में फैलता जा रहा है संघर्ष

यह संघर्ष अब लगातार पांच दिनों से जारी है। इस दौरान अमेरिका ने ईरान पर कई बार हवाई हमले किए हैं, जबकि ईरान ने जवाब में जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैनिकों को निशाना बनाया है।

इन लगातार हमलों ने उस नाज़ुक युद्धविराम को पूरी तरह समाप्त कर दिया है, जिसने कुछ समय के लिए तनाव कम किया था।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना विवाद का सबसे बड़ा केंद्र

अब यह टकराव केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर भी गहरा गया है। अमेरिका का कहना है कि इस समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों का आवागमन बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए।

वहीं, ईरान का तर्क है कि अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (MoU) उसे इस जलमार्ग का प्रबंधन अपनी नीतियों के अनुसार करने का अधिकार देता है। ईरान का यह भी कहना है कि जहाज़ों को निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा और उन्हें पारगमन शुल्क (ट्रांजिट टोल) भी देना पड़ सकता है।

ईरान ने समझौता ज्ञापन का दिया हवाला

ईरान का कहना है कि यह समझौता होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर उसके दावे का समर्थन करता है। अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 5 में कहा गया है, "इस्लामी गणराज्य ईरान, ओमान सल्तनत तथा फ़ारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ लागू अंतरराष्ट्रीय कानून और तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए बातचीत करेगा।"

ईरान का कहना है कि यह समझौता उसे इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले समुद्री यातायात को विनियमित करने का अधिकार प्रदान करता है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया है, जिससे इस मार्ग से होने वाला समुद्री व्यापार ठप हो गया है। ईरान ने उन जहाज़ों पर भी हमले किए हैं, जो उसके अनुसार अनधिकृत मार्गों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर और अधिक हवाई हमले किए।

लगातार हो रही जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने संघर्ष का ऐसा चक्र पैदा कर दिया है, जो अब पांच दिनों से जारी है। युद्धविराम टूटने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया में तेल और गैस निर्यात के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।