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ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन युद्धविराम समाप्त घोषित किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगा, लेकिन उन्होंने युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा कर दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर नए सिरे से हमले किए हैं और कतर ने तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास तेज कर दिए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर सहमत हो गया है, हालांकि उन्होंने यह भी घोषणा की कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान ने आगे बातचीत का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन अब युद्धविराम को प्रभावी नहीं मानता।

“इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमसे ‘बातचीत’ जारी रखने का अनुरोध किया है। हम ऐसा करने के लिए सहमत हो गए हैं, लेकिन अमेरिका ने उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया है कि युद्धविराम समाप्त हो चुका है!” ट्रंप ने लिखा।

कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जारी है संघर्ष

यह बयान दोनों देशों द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में एक-दूसरे पर सैन्य हमले करने के बाद आया है। ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने गुरुवार को खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों में किए गए हमलों के जवाब में किए गए थे।

नए सिरे से शुरू हुई हिंसा ने चिंता बढ़ा दी है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जबकि कूटनीतिक संपर्क अभी भी जारी हैं।

अंतरिम समझौता नहीं टिक पाया

पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसने चार महीने तक चले संघर्ष को समाप्त किया था। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। हालांकि, यह समझौता नए सिरे से शुरू हुई दुश्मनी को रोकने में सफल नहीं रहा और हाल के दिनों में दोनों पक्ष फिर से सैन्य कार्रवाई में लौट आए हैं।

ट्रंप पर संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त न कर पाने को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। लगातार जारी युद्ध इस साल के अंत में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले एक बड़ा मुद्दा बन गया है, क्योंकि अमेरिकी नागरिक बढ़ती ईंधन कीमतों और बढ़ती जन असंतुष्टि का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा- युद्धविराम अब मान्य नहीं है

इस सप्ताह की शुरुआत में अंकारा में बोलते हुए ट्रंप ने कहा था कि 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है। इस संघर्ष विराम ने कई हफ्तों तक चले भीषण संघर्ष को रोका था, लेकिन दोनों पक्षों के बीच छोटे-छोटे टकरावों के कारण यह बार-बार प्रभावित हुआ। ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “घटिया लोग” और “बीमार लोग” बताया।

अमेरिका ने कूटनीतिक रास्ता खुला रखा

युद्धविराम समाप्त घोषित करने के बावजूद ट्रंप ने संकेत दिया कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह कारोबारी से दूत बने स्टीव विटकॉफ और अपने दामाद जेरेड कुशनर से बात करने की योजना बना रहे हैं, जो अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।

हालांकि, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर तेहरान बातचीत को आगे बढ़ाना चाहता है तो अगला कदम उठाने की जिम्मेदारी उसकी है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव से बढ़ा संकट

यह संघर्ष महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक भी फैल गया है। ईरान ने हाल के दिनों में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने हमले किए हैं। तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले भी किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

इन हमलों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।

कतर ने मध्यस्थता के प्रयास तेज किए

नए सिरे से शुरू हुए संघर्ष के बीच स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को बातचीत के लिए ईरान पहुंचा। इस यात्रा को तनाव कम करने और वॉशिंगटन तथा तेहरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने के दोहा के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, “इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मंगलवार की घटनाओं के बाद मध्यस्थ के रूप में कतर की भूमिका को मजबूत करने का प्रयास करना बताया जा रहा है,” जब कतर ने ईरान पर एक एलएनजी (LNG) जहाज पर हमला करने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो अन्य टैंकरों को भी निशाना बनाया गया।

नए कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं जब क्षेत्रीय शक्तियां कोशिश कर रही हैं कि यह ताजा तनाव एक बड़े संघर्ष में न बदले, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर और अधिक असर पड़ सकता है।